ईरान-अमेरिका तनाव… सारा खेल तेल का

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ईरान के साथ रिश्तों में अमेरिकी तल्खी का कारण कोई और नहीं बल्कि कच्चे तेल में ज्यादा से ज्यादा मुनाफे का खेल है। अमेरिका ने ईरान के साथ तनाव बढ़ाकर कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा कराना और इसकी आड़ में अपने तेल भंडार के कच्चे तेल की बढ़ी हुई दरों पर खपाने के लिए पूरी योजना को अंजाम दिया है। उसने शिया बहुल ईरान को सुन्नी बहुल अरब मुल्कों से अलग थलग करने के लिए पाकिस्तान के साथ भी अपने रिश्तों में गर्माहट घोलना शुरू कर दिया है।


अमेरिका ने कई दशकों तक अपने तेल भंडारों को सुरक्षित करके खाड़ी के मुल्कों और रूस व वैनेजुएला जैसे तेल उत्पादक देशों के तेल भंडारों को खत्म करके अपनी मोनोपॉली स्थापित करने की योजना बनाई थी। लेकिन अब हालात यह है कि 2035 तक विश्व केे ज्यादातर मुल्क वैकल्पिक ईधन को अपना लेंगे और तब पेट्रोल-डीजल जैसे ईधन अप्रासंगिक हो जाएंगे। अमेरिका को अब यही चिंता सता रही है कि अपने विशाल तेल भंडारों को कैसे बेचकर ठिकाने लगाएं।


गौरतलब है कि अमेरिका ने तेल की आपूर्ति बढ़ाकर 2014 में कच्चे तेल की कीमतों को 32 डालर तक नीचे उतारकर रूस और वैनेजुएला की आर्थिकी का भट्टा बिठा दिया था। खाड़ी के मुल्कों का मुनाफा भी इससे काफी घट गया था जिससे यूएई जैसी टेक्स फ्री देशों को पांच फीसदी वैट लगाकर घाटे की भरपाई करने को विवश होना पड़ा। अब अमेरिका इस बार तेल के दाम बढ़वाकर अपने कच्चे तेल के भंडारों से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहता है। इसके लिए उसने ईरान को पहले ही दूसरे देशों को तेल बेचने से रोकने की रणनीति पर काम किया।
अब ईरान में तनाव बढ़ाकर तेल की कीमतें मंहगी करने की योजना पर काम कर रहा है। अमेरिका-ईरान के रिश्तों में जितना तनाव बढ़ेगा और तेल की कीमतें बढ़ती जाएंगी। जाहिर है कि अमेरिकी तेल के खेल में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट पडऩे वाली है और आम लोगों के जेब का बोझ भी बढ़ेगा।

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