#राजगढ़_थप्पड़_कांड, भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बद्रीलाल यादव के बिगड़े बोलों से उपजा नया विवाद

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आखिर हम कहां जा रहे हैं?


प्रसंगवश: राजेश सिरोठिया


राजगढ़ में कलेक्टर साहिबा का थप्पड़ कांड दिनों दिन विद्रूपता धारण करता जा रहा है। इसमें ताजा आग भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बद्रीलाल यादव के बिगड़े बोलों से उपजा है। यादव का कहना है कि राजगढ़ कलेक्टर निवेदिता कांग्रेसियों को गोद में बिठाकर दूध पिला रहीं हैं और भाजपा कार्यकर्ताओं को थप्पड़ जड़े जा रहे हैं। वैसे तो गोदी में बिठाकर दूध पिलाना एक मुहावरा है जिसका प्रयोग किसी को संरक्षण देने के संदर्भ में होता है। लेकिन किसी महिला के संदर्भ में यह मुहावरा बिल्कुल ठीक नहीं है। यह व्दिअर्थी और अश्लील नजर आता है। इस लिहाज से बद्रीलाल यादव ने किसी महिला कलेक्टर के संदर्भ में इस तरह की टिप्पणी करके निंदनीय कार्य किया है। राजगढ़ में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भाजपाईयों की रैली की भी बात की जाए तो वहां भी कलेक्टर निवेदिता को भीड़ में नहीं घुसना था। आखिर मामला किसी के विरोध का तो था नहीं यह तो विशुद्ध रूप से संसद के दोनों सदनों में पारित कानून के समर्थन में रैली का मामला था। ऐसे में किसी भी प्रशासनिक अफसर को भीड़ में घुसने की कोई तुक नहीं थी। यह काम पुलिस का है कि वह कानून व्यवस्था का काम देखे और कलेक्टर को लगे कि मामला बूते के बाहर जा रहा है तो पुलिस को बल प्रयोग की अनुमति दे। लेकिन बात पुलिस के संदर्भ में हो या प्रशासनिक सेवाओं के संदर्भ में वालीवुड और टॉलीवुड में कलेक्टरों या पुुलिस अफसरों पर बन रही फिल्मों की छाप उनकी कार्यशैली में साफ देखी जा सकती है। भारतीय समाज में पुरूषों का महिला के हाथों पिटना घनघोर अपमानजनक माना जाता है। इसके विपरीत कोई पुरूष किसी पुरूष को पीटता है तो उसे उतना अन्यथा नहीं लिया जाता। बात चाहे जो भी लेकिन परिपक्व होते लोकतंत्र में अपने पद या जुबान की मर्यादा लांघने का हक किसी को नहीं है। वरना यह लोकशाही अराजकता के ऐसे दौर में प्रवेश कर जाएगी जहां लोकतंत्र की आत्मा लहुलुहान होने से कोई नहीं रोक सकेगा।

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