पीयूसी पर संदेह, जहरीला धुआं छोडऩे वाले वाहनों को भी दे रहे सही का प्रमाण पत्र

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भोपाल। दोपहर मेट्रो, प्रदूषण जांच यूनिट (पीयूसी) धुआं छोड़ने वाले कई वाहनों कोक भी सही का प्रमाण पत्र दे रहे हैं। ऐसा सभी पीयूसी संचालक नहीं कर रहे हैं, लेकिन कुछ रुपए कमाने मषीन में छेड़छाड़ कर इन हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। इसका नतीजा वातावरण में प्रदूषण बढऩे के तौर पर सामने आ रहा है।


यह बात बीते दिनों भोपाल में हुई केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (एमओईएफ) के सचिव सीके मिश्रा व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के चेयरमैन एसपीएस परिहार की मौजूदगी में हुई बैठक में उठी थी। यह बैठक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के प्रदेष कार्यालय में हुई थी। दरअसल, राजधानी में सडक़ों के किनारे पीयूसी यूनिटें वाहनों में रखी रहती हैं। शुल्क देकर कोई भी वाहनों से निकलने वाले धुआं की जांच करा सकते हैं। ये मषीनें बताती हैं कि वाहन तय मात्रा से अधिक धुआं छोड़ रहा है या फिर तय मात्रा के अंदर ही धुआं छोड़ रहे हैं। ये जांच के बाद प्रमाण पत्र भी देते हैं जो आरटीओ आदि जगह मान्य होता है। इस तरह वाहन की कंडीषन पर चलती है और आरटीओ उसे आगे चलने के लिए परमिट करता है। बैठक में इन में से कुछ यूनिटों द्वारा दिए जा रहे प्रमाण पत्रों पर संदेह जताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ पीयूसी संचालक अपने हिसाब से मषीन की सेटिंग करके भी प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं। ऐसा वाहनों को कंडम होने से बचाने के लिए किया जा रहा है, ताकि ही आरटीओ से परमिट लेने के लिए भी ये हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं।

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