जो वाहन दिल्ली में बैन, वे भोपाल की सडक़ों पर दौडक़र हवा को बना रहे जहरीला

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एमओईएफ व सीपीसीबी के अधिकारियों ने मप्र में पुराने वाहनों पर रोक लगाने की चर्चा की

जल्द ही नीति बनाने पर होगा काम

अभी नहीं है पुराने वाहनों पर बैन लगाने के नियम
भोपाल। दिल्ली जैसे दूसरे प्रदेषों में बैन हो चुके पुराने वाहन भोपाल समेत मप्र की सडक़ों पर बिना रोक-टोक के दौड़ रहे हैं। ये वाहन आप और हम सभी के लिए खतरा है, क्योंकि ये जहरीला धुआं छोड़ते हैं। यही धुआं हवा को जहरीला बना रहा है, जिसे हम और आप प्राण वायु के रूप में लेते हैं। हवा के प्रदूषित होने से ह्दय रोग समेत कैंसर कारक कई बीमारियां होती हैं। सैंकड़ों लोग प्रदूषण की वजह से असमय मौत के मुंह में समा रहे हैं। ऐसे पुराने व जहरीला धुआं छोडऩे वाले वाहनों को भोपाल समेत मप्र में भी बैन करने की तैयारी है। इन पर प्रतिबंध के लिए नियम बनाए जाएंगे। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (एमओईएफ) के सचिव सीके मिश्रा व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन एसपीएस परिहार बीते शुक्रवार भोपाल में थे। दोनों ने पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) मप्र समेत अन्य विभागों के अधिकारियों से चर्चा की है। नियम बनाने को लेकर सुझाव भी मांगे हैं। नियम के अमल में आने के बाद भोपाल के 25 से 30 हजार समेत मप्र के लाखों पुराने वाहन सडक़ों पर नहीं चल सकेंगे।

भोपाल की हवा प्रदूषित हो रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से बढक़र 310 तक पहुंच चुका था। इसकी वजह पार्टिकुलेट मैटर 10 समेत अन्य हानिकारक मैटर, गैसों का स्तर बढऩा है। पीएम 10 का वार्षिक स्तर 135 से 140 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच रहा है, जो कि 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए। वातावरण में ऐसे हानिकाकर मैटर व गैसों का स्तर बढऩा मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इसकी वजह उखड़ी सडक़ें, खुले में हो रहे निर्माण कार्य, औद्योगिक इकाईयों का धुआं समेत पुराने वाहनों द्वारा छोड़ा जा रहा धुआं हैं। धुएं में वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (वाष्पशील कार्बिनक यौगिक), सल्फर डाईआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाईआक्साइड व अन्य हानिकारक मैटल होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। पर्यावरण विभाग, पीसीबी व स्थानीय एजेंसी इन कारकों पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दिशा में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की तैयार शुरुर कर दी है।

पुराने वाहन अच्छे, पर कुछ छोड़ते हैं जहरीला धुआं

एमओईएफ व सीपीसीबी के अधिकारियों ने पुराने वाहनों को बैन करने के लिए विस्तृत नीति की जरुर पर बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि सभी पुराने वाहनों को बंद कर दिया जाए, क्योंकि कई पुराने वाहन फिट होते हैं, ज्यादा धुआं नहीं छोड़ते है। ऐसे वाहनों पर बैन लगा देना ठीक नहीं होगा। वहीं ऐसा भी न हो कि पुराने वाहन जहरीला धुआं छोडक़र प्रदूषण कम करने की पूरी कोशिशों पर पानी फेर दें।

भोपाल में पीएम-10 का वार्षिक स्तर माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर में
साल पीएम-10
2018 135
2017 93
2016 89
2015 158
2014 159
2013 222

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