सरकार की गले की फांस बना आरक्षण

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  • 21.1 प्रतिशत ओबीसी आबादी के सामने फंसी कमल नाथ सरकार
  • कोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण पर लगाई है रोक
  • 21.1 प्रतिशत आबादी है मप्र में ओबीसी की (2011)
  • १ करोड़ ५३ लाख ४० हजार हैं ओबीसी जनसंख्या

भोपाल, दोपहर मेट्रो। मध्यप्रदेश की कमल नाथ सरकार के लिए ओबीसी आरक्षण गले की फंस बन गया है। सरकार इस मामले पर न ही बयान जारी कर रही है, न ही कोर्ट में जवाब पेश कर पा रही। यही कारण है कि लोक सेवा आयोग की भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण से हाईकोर्ट की रोक के बाद सरकार पर ओबीसी वर्ग को कोर्ट में धोखा देने के आरोप लगने लगे हैं। कोर्ट के निर्णय से हाल की 400 नियुक्तियां प्रभावित होंगी। गौरतलब है कि हाल ही में एमपीपीएससी ने 14 नवंबर को विज्ञापन जारी कर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेबर इंस्पेक्टर सहित कुल 450 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। इन पदों में वृद्धि भी की गई है। पूर्व में सरकार ने कोर्ट को बताया था कि 1990 में आई महाजन आयोग की सिफारिश के आधार पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किया गया है। प्रदेश में प्रतिनिधित्व के आधार पर ओबीसी को अधिक आरक्षण की जरूरत है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में ओबीसी की संख्या कुल जनसंख्या का 21.1 प्रतिशत है।


वहीं, व्यापमं मामले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि मप्र में कांग्रेस की सरकार बनवाने में किसानों की अहम भूमिका थी, किसानों ने सोचा था कि 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा, लेकिन सरकार ओबीसी, एसटी, एससी वर्ग से जुड़े केसों की पैरोकारी हाइकोर्ट में प्रभावी तरीके से नही कर पा रही है। वहीं, आरएसएस आरक्षण के खिलाफ है यह कल कोर्ट में साबित हो गया। आरएसएस के महाकौशल प्रांत के सरसंघचालक प्रशांत सिंह ने आरक्षण का विरोध किया है। जबकि सरकार ने अपना पक्ष ठीक से नहीं रखा।

सरकार को दी चेतावनी
इससे ओबीसी वर्ग सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का मन बना रहा है।
ओबीसी वर्ग के कंशराज यादव ने सरकार को पत्र लिखकर मामले में ओबीसी वर्ग का पक्ष रखने की बात कही है। साथ ही सरकार द्वारा पूर्व में आरक्षण की घोषणा करने और कोर्ट में पक्ष रखने से आनाकानी करने का सच ओबीसी वर्ग को बताने की चेतावनी दी है। ओबीसी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा, इसके कारण ओबीसी वर्ग की तरफ से पक्ष कमजोर रहा और कोर्ट ने एमपीपीएससी भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण पर रोक लगा दी। ओबीसी वर्ग के संगठनों ने अपनी तरफ से पक्ष रखने की कोशिशें भी की, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले में पक्ष रखने वाले आप कौन होते हैं। इस तरह ओबीसी वर्ग को मायूसी हाथ लगी है।

जज का कहना
चीफ जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि जब तक सरकार इनकी याचिका पर जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक एमपीपीएससी ओबीसी को 14प्रतिशतआरक्षण जारी रखे। मामले में अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

किसने लगाई है याचिका
आरक्षण देने के मामले में यूथ फॉर इक्वेलिटी संस्था, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे, मेडिकल छात्र आशिता दुबे, रिचा पांडे, पीएससी उम्मीदवार सूर्यकांत शर्मा, पियूष जैन आदि ने याचिका दाखिल की है। गौरतलब है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी के मद्देनजर शासकीय सेवाओं में ओबीसी को दिया जाने वाला आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 फीसदी करने को चुनौती देने वाली अब तक 11 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हो गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तय की है गाइड लाइन
सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ ने 1995 में इंदिरा साहनी केस में स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी भी परिस्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न हो। मप्र में अभी यह पेंच फंस रहा है। मप्र में अनुसूचित जाति को 16, जनजाति को 20, ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। ओबीसी कोटा 27 प्रतिशत करने से कुल कोटा 63 प्रतिशत हो गया। जबकि आर्थिक कमजोर सामान्य वर्ग को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। ऐसे में सामान्य वर्ग के लिए सिर्फ 27 प्रतिशत सीट ही बचती हैं।

इनका कहना

कोर्ट में चुप क्यों है सरकार : अपाक्स
पूर्व में सरकार ने ही 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। जब ओबीसी वर्ग को लाभ देने की बारी आई तो कोर्ट में मजबूत पक्ष नहीं रखा गया। अपाक्स संगठन समेत अन्य ने पक्ष रखने की कोशिश की तो कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया। पूर्व में कई बार सरकार से निवेदन किया था कि कोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता नियुक्त किए जाएं। फिर भी सरकार के अधिकारियों ने कोई बात नहीं सुनी। मंगलवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का नतीजा यह रहा कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण का मामला धरा का धराया रह गया। इस मामले में सरकार से मिलकर बातचीत की जाएगी।
भुवनेश कुमार पटेल,अध्यक्ष,अपाक्स

महाधिवक्ता को हटाए सरकार : भारतीय
मप्र कांग्रेस पार्टी के विधानसभा घोषणा पत्र में यह बात लिखी थी कि ओबीसी का आरक्षण 13.5 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जायेगा। सरकार में आते ही कुछ समय बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने इसकी घोषणा भी की थी। कुछ समय बात कुछ याचिकाकर्ता न्यायालय की शरण मे गए ओबीसी आरक्षण के खिलाफ जिसकी सुनवाई (तारीखों) में शशांक शेखर लगातार गैर हाजिर रह रहे थे, जिसके परिणाम रहा कि जबलपुर उच्चतम न्यायलय ने पीएससी परीक्षा में 27प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी। यदि कमलनाथ जी की सरकार शंशाक शेखर को नही हटाती है तो ये स्पष्ठ होता है कि पिछड़ों के साथ सरकार न्याय नही चाहती है।
यश भारतीय, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, मप्र समाजवादी पार्टी

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