शाहीन बाग:शाह को किस बात का इंतजार?

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प्रसंगवश: राजेश सिरोठिया

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शाहीन बाग के आंदोलनकारियों के सामने सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थ भी नाकाम हो गए। इन मध्यस्थों को अपने हुनर पर पूरा भरोसा था। लेकिन हकीकत तो यही है कि कोई बात उसी को समझाई जा सकती है,जो नासमझ हो, लेकिन जो समझते बूझते हुए भी नासमझी का स्वांग रच रहा हो उसे भला कैसे समझाया जा सकता है? शहीन बाग कोई संयोग या प्रयोग नहीं है। उसे तो आंदोलनकारियों ने संसद में  पारित नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी की आशंका से ग्रसित लोगों को पूरे देश में सरकार के खिलाफ जेहाद का प्रतीक बना दिया है। यदि शाहीन बाग से वह पीछे हटे तो पूरे देश में मचा बवाल ही थम जाएगा। इसलिए शाहीन बाग का धरना और चक्काजाम चलाया जाता रहेगा। लेकिन यह क्या बात हुई। धरना चक्काजाम तो पुलिस और प्रशासन की समस्या है। फिर वह किसके इशारे का इंतजार कर रहे हैं। देश में पहली दफे ऐसा हो रहा है कि प्रशासन और पुलिस शाहीन बाग की समस्या का समाधान नहीं खोज पा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और उसके मुखिया अमित शाह साब भी उन्हें इस समस्या का हल नहीं सुझा पा रहे हैं। बड़ी हैरत की बात है कि एक चक्काजाम को हटवाने के लिए लोगों को देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे पर दस्तक देना पड़ रही है। आखिर यह क्या दर्शाता है। ताबड़तोड़ फैसले लेने के लिए मशहूर मोदी और शाह की जोड़ी के शाहीन बाग के आंदोलनकारियों का धरना चक्काजाम खत्म कराने में हाथ पैर क्यों फूल रहे हैं। आंदोलन चलने भी दें तो कोई बुराई नहीं है, लेकिन उसे कम से कम ऐसी जगह तो शिफ्ट कर दें कि उनकी अभिव्यक्ति की आजादी इस राह से गुजरने वाले मुसाफिरों के मौलिक अधिकारों का गला न घोंटें। लेकिन क्या शाह को पता है कि केंद्र के इस पसोपेश से देश में क्या संदेश जा रहा है? क्या उन्हें नहीं पता कि उनकी कमजोरी देश विरोधी ताकतों को देश के कई हिस्सों सिर उठाने का मौका दे रही हैं? अगर सीएए लागू किया है तो कहेंं कि वह पूरी सख्ती से लागू होगा। यदि एनआरसी लाने का कोई विचार नहीं हैं तो साफगोई दिखाते हुए कहें कि एनआरसी देश में लागू नहीं होगा। अगर सरकार को ऐसे ही ढुलमुपन दिखाना है तो मोदी और मनमोहन की सरकार का फर्क क्या है। यूपीए की सरकार के वक्त तो अण्णा के धरने को बलपूर्वक हटाया गया था। क्या आप शाहीन बाग के आंदोलनकारियों को प्रेम से जंतर मंतर पर नहीं बिठा सकते? आखिर किस मौके का इंकजार मोदीजी और अमित शाह कर रहे हैं?

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