मोदी का मीडिया(सोशल)से क्या मोहभंग हो गया है?

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प्रसंगवश: राजेश सिरोठिया

देश के वजीरे आजम नरेंद्र मोदी का सोशल मीडिया से वाकई मोहभंग हो गया है? मोदी का बीती रात ट्वीट करके यह कहना कि वह सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म से रविवार को तौबा करने पर विचार कर रहे हैं, आखिर क्या दर्शाता है? प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया से तो वह 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के साथ ही दूर हो चले थे। लेकिन सोशल मीडिया को उन्होंने 2014 के चुनाव के पहले से काफी सशक्त औजार के बतौर इस्तेमाल किया।

उन्होंने चुनाव जीतते ही यह तय कर लिया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया उनका सबसे बड़ा माध्यम होगा। इसका उन्होंने और उ्रकी सोशल मीडिया टीम ने बखूबी इस्तेमाल भी किया। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ जिसके चलते उनके मन में सोशल मीडिया से दूरी बनाने का विचार पैदा हुआ? मन की बात करने में यकीन रखने वाले मोदी जी वैसे भी डायलॉग (संवाद)के बजाए मोनोलॉग (इकतरफा संवाद) में ज्यादा भरोसा रहा है। ऐसे में ले-देकर सोशल मीडिया ही ऐसा मंच है जिसके जरिए वह और उनकी टीम आम जनता की नब्ज को टटोल पाती है। देश का फीडबैक जान पाती है। ऐसे में मोदी भला कैसे सोशल मीडिया से दूर रह सकते हैं क्या खुद को कैसे दूर कर सकते हैं? दरअसल जिस सोशल मीडिया का इस्तेमाल मोदी अपने और अपनी भाजपा के लिए करते आए हैं, वह दुधारी तलवार की तरह ही होता है।

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बिल्कुल प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की तरह। सही कहें तो सोशल मीडिया की दो धारी तलवार की धार काफी तेज होती है। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया जैसे मंचो को तो सरकार नियंत्रित भी कर लेती है। लेकिन सोशल मीडिया तो बिफरे जिन्न की तरह कुछ भी कर सकता है। बैक फायर भी वह करता है और हाल ही के कुछ वाकयों से समझने की कोशिश करें तो यह कर भी रहा है। बात चाहे कुछ भी हो लेकिन एक बात तय है कि मोदी सोशल मीडिया से न तो खुद को दूर कर सकते हैं और न सोशल मीडिया उनको दूर रहने देगा। वह ट्विटर, व्हाटएप,फेसबुक और इंस्टाग्राम से हट जाएं तो भी इन संचार माध्यमों पर तारीफ और आलोचना के जरिए बने ही रहेंगे। फिर क्या?

इन दावों में भी काफी दम लगता है कि मोदी के दिमाग में सोशल मीडिया का कोई देशी प्लेटफार्म का फार्मूला काम कर रहा है। बहुत संभव है कि देश का कोई निवेशक उनकी योजना को परवान चढ़ाने के लिए आगे आए। और फिर मोदी स्वंय उस पर प्रकट हों। जाहिर सी बात है कि वह आंएंगे तो उनके करोड़ों समर्थक भी उस पर शिद्दत से मौजूद होंगे। जब मोदी समर्थक होंगे तो उनकी रणनीति को समझने के लिहाज से करोड़ों विरोधी भी जुटेंगे। तब शायद देशी मीडिया के जरिए वह झूठ और प्रंपच पर नियंत्रण करने की सोचें जो अभी विदेशी सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर बहुत मुुमकिन नहीं हो पा रहा है।

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