बॉयकाट अमेजान, बॉयकाट फिल्पकार्ट और बॉयकाट चीन

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प्रसंगवश: राजेश सिरोठिया

भाारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम को पंचर करने के लिए अमेजान और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कामर्स स्टोर्स ने अपनी वेबसाइट और मोबाईल एप्स पर चीन में बने इलेक्ट्रानिक उत्पादों को प्रमोट करना शुरू कर दिया है। यह कोई अनजाने में उठाया गया कदम नहीं है। चीन को घुटनों पर लाने के लिए भारत के लिए जरूरी है कि उसकी आर्थिक रूप से कमर तोड़ी जाए। इसे अंजाम देने का तरीका आत्म निर्भर भारत बनने में तो बरसों लगेंगे। और शायद वह आगे बन भी न पाए लेकिन अभी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वह चीनी साजो सामान की जगह दूसरी भारतीय और गैर चीनी देशों में बने उत्पादों को अपनाएं।
यह तो सभी जानते हैं कि चीन वामपंथ की बुनियाद पर खड़ा है। लेकिन आर्थिक उदारीकरण और अर्थव्यवस्था के दौर में वह दुनिया का सबसे तेज और सबसे बड़ा व्यापारिक देश साबित हुआ है। लेकिन वह ऐसा वामपंथी देश है जो व्यापारी बनने के साथ खुद को बाहूबली भी साबित करना चाहता है। उसने गलवन घाटी और पेंगोंग लेक में घुसपैठ भारत की सरकार की दिशा को भटकाने के लिए की है। उसने सुविचारित रणनीति के तहत भारत को पाक अधिकृत कश्मीर की तरफ जाने से रोकने के लिए ही भारतीय सेना को उसकी गीदड़ भभकियों को हमने सहन कर लिया तो वह भारत को पाक अधिकृत कश्मीर में घुसने से रोकने के मकसद में अरूणाचल , सिक्किम और लद्दाख में उलझाया है

दरअसल कश्मीर में धारा 370 और आर्टिकल 35 ए के हटने के बाद से चीन बेचैन और परेशान है। अमित शाह ने पीओके के साथ 1962 में छीने गए अक्साई को वापस लेने की बात से चीम चिढ़ गया। चीन उसे लग रहा था कि आगे पीछे पीओके को भी भारत कब्जे में ले लेगा। यदि ऐसा हुआ तो पीओके से होकर पाकिस्तान जाने वाले अपने इकॉनामिक कॉरीडोर का काम प्रभावित होगा। इसी के चलते उसने कोरोना से उपजे संकटकाल के वक्त को भारत को धौंसाने के लिए पूरी सोच के साथ चुना । उसे अंदाजा था कि कोरोना के कारण चरमराती आर्थिकी के बीच भारत चीन को माकूल जवाब नहीं दे पाएगा। हालांकि अभी तो उसके पांसे जरूर उल्टे पड़ते दिख रहे हैं लेकिन इस पर उसे पक्की मात तभी मिलेगी जब हम चीनी उत्पादों का बॉयकाट करके चीनी कारोबारियों और चीन सरकार की कमर तोड़ेंगे। कोरोना काल में आनलाइन काम पर निर्भरता बढऩे के चलते मोबाईल, लेपटॉप और डेस्कटॉप की मांग बढ़ी है।


बहिष्कार के आव्हान के बावजूद इसके चलते चीन ने 1 लाख 40 हजार करोड़ रूपए के इलेक्ट्रानिक उत्पाद भारतीय बाजार में खपा दिए हैं। इसलिए लैपटाप डेस्कटाप मोबाईल में सक्रिय चीनी कंपनी का नाम लेनोवो , हुवैई है। इनके अलावा शियोमी, वन प्लस, ओप्पो, रेडीमी जैसी कंपनियों को गजेट्स भारत में जमकर बिकते हैं। लैपटाप डेस्कटॉप के मामले में भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी एचसीएल के उत्पाद सहजता से उपलब्ध हैं। एचपी अमेरिका की है। एसर और असुस ताइवान की कंपनी है। तोशीबा,सोनी जापानी, सेमसंग दक्षिण कोरिएन कंपनी है जिसकी विश्व की सबसे बड़ी मोबाईल फेक्टरी नोयडा में है। भारतीय मोबाईल कंपनी माइक्रोमेक्स, लावा, और कार्बन को भी मोबाईल उत्पादन शुरू करना होगा।


इसके अलावा राखियों से लेकर पटाखों तक के बहिष्कार से बात बनेगी। लव्वोलुआब यही है कि बाहुबली व्यापारी केे बाहुबल को छीनना है तो उसके व्यापारिक हितों पर चोट करना होगी। यह काम केवल सरकार के स्तर पर मुुमकिन नहीं हैं पर देश के जिम्मेदार नागरिकों को भी इसके लिए आगे आना होगा। बहिष्कार के साथ देश को अपने पैरों पर खड़ा करने की पहल भी करना होगी।

युवाओं का कहना है

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