खासगी मामला: अगले तीन दिन महत्वपूर्ण

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भोपाल,दोपहर मेट्रो। कीमती संपात्तियां औनेपौने दाम पर बेचने के मामले में इंदौर के खासगी ट्रस्ट को लेकर शिवराज सरकार के आननफानन एक्शन ने मप्र की नौकरशाही में हडकंप पैदा कर दिया है। इसमें पूर्व मुख्यसचिव बीपी सिंह के निशाने पर आने के साथ ही उन पर प्रकरण दर्ज होने की आशंका भी जताई जा रही है।इस मामले में अगले तीन दिन काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं,क्योंकि जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने शनिवार तक खासगी ट्रस्ट से अठारह बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।इसके बाद जांच व कार्रवाई की दिशा नये सिरे से तय होगी।
जानकार सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल रात इस सबंध्ा में बीते दो दिन में हुई कार्रवाई की जानकारी वरिष्ठ अफसरों से ली है।इंदौर में पदस्थ रहे एक अफसर से भी जरूरी फीडबैक मांगा गया है। इसके साथ ही जांच के लिये नौ पुलिस अध्ािकारियों की अतिरिक्त रूप से तैनाती करने का फैसला हुआ।बताया जाता है कि जल्द ही जांच टीम उन राज्यों का दौरा करेगी जहां की संपत्तियां बेचे जाने का आरोप है।इसमें विशेष तौर पर हरिद्वार का कुशावर्त घाट का मामला है। बताया जाता है कि जल्द ही राज्य सरकार देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा देशभर में निर्मित संपत्तियों को अपने अध्ािपत्य में लेने के लिये प्रयासरत है ताकि इन्हें खुर्दबुर्द होने से बचाया जा सके।इनकी मौजूदा कीमत दस हजार करोड़ रूपये से ज्यादा मानी जा रही है।

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दो अफसरो की भूमिका के चर्चे
इस समूचे मामले में दो अफसरों की भूमिका खास चर्चित है। इनमें इंदौर में चार साल तक संभाग आयुक्त रहे बीपी सिंह की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो गये हैं। सिंह इंदौर से स्थांनातरित होने के कुछ ही समय बाद मप्र के मुख्यसचिव पदस्थ कर दिये गये थे।उन्हें शिवराज सरकार के पसंदीदा अफसरों में गिना जाता था।रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने भी उनका पुनर्वास किया था।खासगी ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिध्ाि के तौर पर शामिल सिंह ने कुछ संपत्तियों को बेचने की मंजूरी दी थी।उध्ार दूसरे अफसर अतिरिक्त मुख्यसचिव स्तर के मनोज श्रीवास्तव हैं,जिन्होंने इस मामले की आठ साल पहले बहुत खामोशी से जांच की और इसे अंजाम तक पहुंचा दिया।श्रीवास्तव जल्द रिटायर भी होने वाले हैं।

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