EPFO के नए नियम: बीमारी में बिना लिमिट, पढ़ाई के लिए 10 और शादी के लिए 5 बार निकाल सकेंगे PF एडवांस

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ खाते से एडवांस निकालने के नियमों को आसान बनाया है। नए नियमों के तहत कर्मचारी बीमारी, पढ़ाई, शादी और मकान से जुड़ी जरूरतों के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार अपने पीएफ खाते से पैसा निकाल सकते हैं। निकासी के अलग-अलग कारणों के लिए सीमा तय की गई है, जबकि पात्र सदस्यों के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 महीने रखी गई है।

किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकेंगे PF का पैसा?

1. बीमारी के इलाज के लिए: कर्मचारी अपने या पात्र परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए पीएफ एडवांस ले सकते हैं। इस श्रेणी में निकासी की संख्या पर कोई निर्धारित सीमा नहीं है। हालांकि, योजना की अन्य शर्तें लागू रहेंगी।

2. पढ़ाई के लिए 10 बार: शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार पीएफ एडवांस लिया जा सकता है।

3. शादी के लिए 5 बार: कर्मचारी अपनी या पात्र परिवार के सदस्यों की शादी के लिए सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार एडवांस निकाल सकते हैं।

4. मकान के लिए 5 बार: घर या प्लॉट खरीदने, मकान बनाने, होम लोन चुकाने तथा मकान की मरम्मत या सुधार जैसे पात्र आवासीय उद्देश्यों के लिए कुल 5 बार निकासी की सुविधा है।

5. विशेष परिस्थितियों में साल में 2 बार: विशेष परिस्थितियों के लिए निर्धारित श्रेणी के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 बार पीएफ एडवांस लिया जा सकता है।

कितना पैसा निकाल सकते हैं?
नए नियमों के तहत पात्र सदस्य अपने पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं। खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि बनाए रखने का प्रावधान है, ताकि रिटायरमेंट के लिए बचत सुरक्षित रहे। आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम 12 महीने की सदस्यता अवधि की शर्त भी लागू होती है। वास्तविक पात्र राशि और निकासी पर लागू शर्तें संबंधित प्रावधानों पर निर्भर करेंगी।

कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?
पीएफ सदस्य अपने UAN के माध्यम से EPFO के आधिकारिक सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करके पात्रता और KYC विवरण की जांच कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित एडवांस क्लेम के लिए आवेदन किया जा सकता है। आधार, बैंक खाते और अन्य जरूरी विवरण अपडेट होने से क्लेम प्रक्रिया में मदद मिलती है।

ध्यान दें: पीएफ से एडवांस निकालना और नौकरी छोड़ने के बाद पूरे पीएफ का अंतिम भुगतान लेना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। दोनों के नियमों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

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