मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर जारी राजनीतिक हलचल के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाए जाने पर निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव सामने आने के बाद ही उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
22 अक्टूबर 2026 को इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में ओम बिरला ने कहा कि प्रस्ताव आने पर प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित प्रस्तावों के लिए भी निर्धारित नियम और संवैधानिक प्रावधान हैं, जिनका पालन करना जरूरी है।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर आपत्ति जताई है। विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष भी अपनी मांगें रखी गई हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
पहले भी पेश हो चुका है हटाने का प्रस्ताव
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष पहले भी संसद के दोनों सदनों में नोटिस दे चुका है। अप्रैल 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पहले दिए गए नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था। अब नए प्रस्ताव की संभावनाओं के बीच ओम बिरला के बयान को अहम माना जा रहा है।
क्या है CEC को हटाने की प्रक्रिया?
संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जिनके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए संसद में निर्धारित विशेष बहुमत सहित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। ऐसे में किसी प्रस्ताव का पेश होना अपने आप में पद से हटाए जाने का आधार नहीं बनता।
फिलहाल ओम बिरला ने प्रस्ताव पर पहले से कोई फैसला सुनाने के बजाय नियमानुसार प्रक्रिया अपनाने की बात कही है। अब इस मामले में विपक्ष के अगले कदम और संसद में संभावित कार्यवाही पर नजर रहेगी।

