2022-23 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% रहने का अनुमान- गवर्नर दास

नई दिल्ली : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor) ने एमपीसी के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. रेपो रेट (Repo Rate) 4 फीसदी पर बरकरार है. लगातार 10 वीं बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वहीं, उन्होंने बताया कि  वित्त वर्ष 2022-23 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ (GDP Data) 7.8 फीसदी रह सकती है. आपको बता दें कि सरकार ने बजट में बताया था कि साल  2022-23 के लिए देश की अर्थव्यवस्था के 9.27% की दर से GDP ग्रोथ हासिल करने का अनुमान है.

अगले साल कितनी रहेगी देश की जीडीपी ग्रोथ

वर्ल्ड बैंक ने हाल में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान 8.3 फीसदी रह सकता है. बैंक अपने पहले के अनुमान पर बरकरार है. वहीं, वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 अनुमान को बढ़ाकर 8.7 फीसदी कर दिया.

वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट में कहा था कि भारत की मौजूदा साल में जीडीपी ग्रोथ 9.27 फीसदी रह सकती है. यह सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा होगी. वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि केंद्रीय बजट अमृत काल के अगले 25 सालों का ब्लू प्रिंट है.

सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि हम ओमीक्रोन की लहर के बीच में हैं. हमारी टीकाकरण अभियान की रफ्तार ने बड़ी मदद की है. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सबका प्रयास के साथ, मजबूत ग्रोथ जारी रहेगी.MPC ने पॉलिसी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार है.

आपको बताते चलें कि रेपो रेट वह इंट्रेस्ट रेट होता है जिस दर पर कमर्शियल बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से उधार लेते हैं. रिवर्स रेपो रेट वह इंट्रेस्ट रेट होता है जिस दर पर रिजर्व बैंक बैंकों से पैसा वापस लेता है. बता दें कि रेपो रेट पर बैंक को लोन तो मिलता है लेकिन उसे सिक्यॉरिटीज जमा करनी होती है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की मदद से फाइनेंशियल सिस्टम में लिक्विडिटी कंट्रोल करता है. इसके अलावा महंगाई दर पर लगाम कसने में भी मदद मिलती है. महंगाई को ध्यान में रखते हुए आरबीआई रेपो रेट को बढ़ाने या घटाने का फैसला करता है.

रेपो रेट ज्यादा होने पर बैंकों को ऊंची दरों पर लोन मिलता है. इसके कारण वे ऊंची दरों पर लोन बांटते भी हैं. अगर रेपो रेट कम होगा तो बैंकों को सस्ती दरों पर रिजर्व बैंक के कर्ज मिलेगा. बदले में वे सस्ती दरों पर कर्ज भी बाटेंगे.

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