रीवा के कुलदीप को उनके पिता ने बाल कटिंग की दुकान चलाकर क्रिकेटर बनाया, अब आइपीएल में चयन

जबलपुर । रीवा के उदीयमान दाएं हाथ के तेज गेंदबाज कुलदीप सेन और सिवनी के आलराउंडर मोहम्मद अरशद खान आइपीएल के 15वें संस्करण में खेलते नजर आएंगे। बेंगलुरु में आइपीएल नीलामी के दूसरे व आखिरी दिन रविवार को 20 लाख रुपये के आधार मूल्य पर कुलदीप को राजस्थान रायल्स ने खरीदा। जबकि इतने ही आधार मूल्य पर अरशद मुंबई इंडियंस के हुए।

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अरशद पहली बार मप्र की रणजी ट्राफी टीम में भी चुने गए हैं और राजकोट में प्रदेश की 20 सदस्यीय टीम के साथ अभी अभ्यास में जुटे हुए हैं। वहीं इंग्लैंड के बल्लेबाज लियाम लिविंगस्टोन नीलामी के दूसरे दिन रविवार को सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी रहे। उन्हें पंजाब किंग्स ने 11 करोड़ 50 लाख रुपये में खरीदा।

बाल कटिंग की दुकान चलाकर बेटे को क्रिकेटर बनाया: रीवा के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज कुलदीप सेन रामपाल की पांच संतानों में तीसरे क्रम पर हैं। बाल कटिंग की दुकान चलाने वाले रामपाल और माता गीता ने कुलदीप को क्रिकेटर बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। यही कारण है कि 22 अक्टूबर 1996 को जन्में कुलदीप का क्रिकेट के प्रति लगाव देखकर पिता ने रीवा के प्रसिद्घ विवि मैदान में खेलने भेज दिया। कुलदीप बल्लेबाज बनना चाहते थे लेकिन कोच की सलाह में गेंदबाजी शुरू की और सफलता मिलती चली गई। इस तरह वे रीवा संभाग टीम के भरोसेमंद तेज गेंदबाज बन गए।

कोच ने नहीं ली फीस: कुलदीप की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कोच एरिल एंथोनी ने बिना फीस लिए उसे उम्दा क्रिकेटर बनाने में मदद की।

पिता ने की खर्चों में कटौती:  कुलदीप के पिता रामपाल ने बताया कि बेटे को क्रिकेटर बनाने उन्होंने अपने खर्चों में भी कटौती कर दी। ताकि बेटे को किट खरीद कर दे सकें।

आठ साल की उम्र में अरशद ने मैदान में रखा था पहली बार कदम: सिवनी से 12 किमी दूर गोपालगंज में शिक्षक पिता अशफाक के मार्गदर्शन में अरशद ने महज 8 साल की उम्र में पहली बार क्रिकेट मैदान में कदम रखा और बल्लेबाजी की बारिकियां सीखी। लेकिन समय के साथ वे जिले के बेहतरीन आलराउंडर में शामिल हो गए। महज 14 साल की उप्र में इस क्रिकेटर ने मप्र की जूनियर टीम में उम्दा बल्लेबाजी और मध्यम तेज गेंदबाजी करते हुए जगह बनाई। बाद में वे मप्र अंडर-19 और अंडर-23 टीम के सदस्य भी बने। तीन भाई और एक बहन में सबसे छोटे अरशद को बड़े भाई जकी ने खूब प्रोत्साहित किया।

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अरशद पहली बार मप्र की रणजी ट्राफी टीम में भी चुने गए हैं। साइकिल से सिवनी आते थे: जिला टीम में चयन के बाद अरशद गांव से सिवनी शहर के मैदान तक आने के लिए साइकिल से 12 किमी का सफर तय करते थे।

अरशद के पहले कोच पिता: अरशद के पिता अशफाक बेटे के पहले कोच बने। उन्होंने नईदुनिया से बातचीत में कहा कि अरशद सुबह व शाम में चार घंटे मैदान पर क्रिकेट का अभ्यास करता था।

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