शासन और प्रशासन की नीतियों को बेहतर बनाने में आइआइएम इंदौर करेगा काम

इंदौर। भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर (आइआइएम इंदौर) लगातार शासन और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे सरकारी अधिकारियों और पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने और प्रदान करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों के साथ हाथ मिला रहा है। इसके तहत संस्थान ने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान (एआइजीजीपीए) भोपाल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक नीति, शासन, प्रशासन और संबंधित क्षेत्रों से संबंधित मामलों में सहयोग को बढ़ावा देना और पेशेवर, विद्वतापूर्ण और अकादमिक बातचीत के लिए अवसर प्रदान करना है।

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समझौता ज्ञापन पर आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय और एआइजीजीपीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी जी.वी. रश्मि ने शनिवार को हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एआइजीजीपीए के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी, कार्यक्रम की डीन प्रो. सौम्या रंजन दास, आइआइएम इंदौर की फैकल्टी प्रो. स्नेहा थपलियाल और अन्य अधिकारी मौजूद थे। आइआइएम इंदौर के निदेशक प्रो. राय ने कहा यह सहयोग आइआइएम इंदौर मिशन के अनुरूप है और हम इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हम सार्वजनिक नीति, प्रशासन और सरकार से संबंधित सामयिक मुद्दों पर संग्रह, नीति दस्तावेज आदि तैयार करने और नीति निर्माण के लिए सरकार को इन दस्तावेजों को सौंपने की योजना बना रहे हैं। सहयोग अन्य संस्थानों के सेवारत और सेवानिवृत्त सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और अन्य योग्य व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने पर भी केन्द्रित रहेगा।

शिक्षा और प्रशिक्षण को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी

हम उन्हें आपसी हित के तहत आयोजित कार्यक्रमों, अनुसंधान या विकास कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि हमारा लक्ष्य सरकार और बाहरी एजेंसियों द्वारा संभावित वित्त पोषण के लिए नए शोध परियोजना प्रस्ताव या प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और अवसरों की संयुक्त रूप से पहचान करना है। समझौता ज्ञापन दोनों संस्थानों के शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के बीच सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगा। जी.वी. रश्मि ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि इस सहयोग से दोनों संस्थानों को इन क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशिक्षण को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। पांच साल के लिए वैध समझौता ज्ञापन के तहत व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशालाएं, पैनल चर्चा, संगोष्ठी, वेबिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रमों की प्रोसीडिंग का प्रकाशन करना भी शामिल होगा।

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