बीजेपी दस स्थापना दिवस पर PM मोदी बोले परिवारवादी पार्टियां लोकतंत्र की दुश्मन

भारतीय जनता पार्टी आज अपना 42वां स्थापना दिवस देशभर में पूरे उत्साह के साथ मना रही है। इस अवसर पर हर राज्य व जिले में पार्टी मुख्यालय पर कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा के झंडे फहराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि मेरी प्रार्थना है कि मां स्कंदमाता का आशीर्वाद देशवासियों पर, भाजपा के प्रत्येक कर्मठ कार्यकर्ता और प्रत्येक सदस्य पर हमेशा बना रहे। आज नवरात्रि की पांचवीं तिथि भी है, आज के दिन हम सभी मां स्कंदमाता की पूजा करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हम सबने देखा है कि मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं और अपने दोनों हाथों में कमल का फूल थामे रहती हैं। मैं देश और दुनिया भर में फैले भाजपा के प्रत्येक सदस्य को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से कोहिमा तक भाजपा एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को निरंतर सशक्त कर रही है। इस बार का स्थापना दिवस 3 और वजहों से महत्वपूर्ण हो गया है। पहला कारण है कि इस समय हम देश की आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहे हैं, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। ये प्रेरणा का बहुत बड़ा अवसर है। दूसरा कारण है- तेजी से बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियां, बदलता हुआ ग्लोबल ऑर्डर। इसमें भारत के लिए लगातार नई संभावनाएं बन रही हैं। तीसरा कारण भी उतना ही अहम है। कुछ सप्ताह पहले चार राज्यों में भाजपा की डबल इंजन की सरकारें वापस लौटी हैं। तीन दशकों के बाद राज्यसभा में किसी पार्टी के सदस्यों की संख्या 100 तक पहुंची है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण से देखें या राष्ट्रीय दृष्टिकोण से, भाजपा का दायित्व, भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व लगातार बढ़ रहा है। इसलिए भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता, देश के सपनों का प्रतिनिधि है, देश के संकल्पों का प्रतिनिधि है। इस अमृत काल में भारत की सोच आत्मनिर्भरता की है, लोकल को ग्लोबल बनाने की है, सामाजिक न्याय और समरसता की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन्हीं संकल्पों को लेकर एक विचार बीज के रूप में हमारी पार्टी की स्थापना हुई थी। इसलिए ये अमृत काल भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए कर्तव्य काल है। आज दुनिया के सामने एक ऐसा भारत है जो बिना किसी डर या दबाव के, अपने हितों के लिए अडिग रहता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब पूरी दुनिया दो विरोधी ध्रुवों में बंटी हो, तब भारत को ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है, जो दृढ़ता के साथ मानवता की बात कर सकता है। हमारी सरकार राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए काम कर रही है। आज देश के पास नीतियाँ भी हैं, नियत भी है। आज देश के पास निर्णय शक्ति भी है, और निश्चित शक्ति भी है। इसलिए, आज हम लक्ष्य तय कर रहे हैं, उन्हें पूरा भी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ समय पहले ही देश ने 400 बिलियन डॉलर यानि तीस लाख करोड़ रुपए के उत्पादों के export का target पूरा किया है। कोरोना के इस समय में इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करना, भारत के सामर्थ्य को दिखाता है। गरीबों को पक्के घर से लेकर शौचालय के निर्माण तक, आयुष्मान योजना से लेकर उज्ज्वला तक, हर घर जल से लेकर हर गरीब को बैंक खाते तक ऐसे कितने ही काम हुए हैं, जिनकी चर्चा में कई घंटे निकल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में देश ने ये देखा कि अपने नागरिकों का जीवन आसान बनाना भाजपा सरकारों की, डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता रही है। सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ हम सबका विश्वास प्राप्त कर रहे हैं। देश के विकास के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया देख रही है कि इतने मुश्किल समय में भारत 80 करोड़ गरीबों, वंचितों को मुफ्त राशन दे रहा है। 100 साल के इस सबसे बड़े संकट में गरीब को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है। लेकिन भाजपा ने इस वोटबैंक की राजनीति को ना सिर्फ टक्कर दी है, बल्कि इसके नुकसान, देशवासियों को समझाने में भी सफल रही है। हमारे देश में दशकों तक कुछ राजनीतिक दलों ने सिर्फ वोटबैंक की राजनीति की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को ही वादा करो, ज्यादातर लोगों को तरसा कर रखो, भेदभाव-भ्रष्टाचार ये सब वोटबैंक की राजनीति का साइड इफेक्ट था। स्वार्थ के आधार पर लाभ पहुंचाने की प्रवृत्ति को खत्म करना और समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े आखिरी व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंचे, ये सुनिश्चित करना।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के इस अमृत काल में हमने सैचुरेशन यानी जनकल्याण की हर योजना को शत प्रतिशत लाभार्थियों तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया है, वो बहुत विराट है। सैचुरेशन तक पहुंचने के इस अभियान का मतलब है- भेदभाव की सारी गुंजाइश को खत्म करना, तुष्टिकरण की आशंकाओं को समाप्त करना।

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