नगरीय निकाय से लेकर विधानसभा चुनाव तक नए चेहरों को मौका देने की तैयारी

भोपाल। पीढ़ी परिवर्तन के दौर से गुजर रही भारतीय जनता पार्टी ने नगरीय निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा चुनाव में युवा चेहरों को आगे करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में 30 से 45 साल उम्र के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अधिक मौका मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। संगठन में मंडल स्तर पर अधिकतम 35 एवं जिला स्तर पर 50 साल की अधिकतम आयु वालों को पहले से ही कमान मिल चुकी है। वहीं अब पार्षद से विधायक के लिए भी 40 से 45 साल से कम आयु के चेहरों को अधिक मौका देने की तैयारी है। ये कवायद उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत अगले दो दशक तक पार्टी में नई पीढ़ी को मौका देकर नेतृत्व तैयार करना है। पार्टी का थिंक टैंक संगठन में ऐसा कोई पीढ़ी अंतराल नहीं चाहता, जिससे पार्टी कुछ वर्षों में वयोवृद्ध या युवाओं की कम मौजूदगी वाले दल के रूप में पहचानी जाए।

इससे पहले भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 75 साल या अधिक उम्र के नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने से परहेज किया था। वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बाबूलाल गौर, सरताज सिंह, रामकृष्ण कुसमरिया, माया सिंह, कुसुम महदेले सहित कई नेताओं के टिकट काट दिए थे। इनमें से कई मंत्री भी थे। अगले साल के अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। अनुमान है कि प्रदेश की 42 से अधिक सीटें हैं, जहां आयु वर्ग के लिहाज से युवाओं की संख्या निर्णायक है। इधर, संगठन में भी युवाओं को जिस तरह से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, उससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी युवा शक्ति और अनुभव को अलग-अलग रखते हुए उपयोग में लेने के फार्मूले पर काम कर रही है।

संगठन में बूथ स्तर से प्रदेश स्तर तक के दायित्वों के लिए युवाओं को प्राथमिकता देने से युवा व ऊर्जावान लोगों की सहभागिता बढ़ेगी। मंडल व जिला स्तर पर चुनावी रणनीति व सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जा रहा है। युवाओं को मौका मिलने से उन वर्गों का भी साथ पार्टी को निश्चित तौर पर मिलेगा, जिनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है। भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन कोई विशेष अभियान नहीं बल्कि स्वाभाविक प्रक्रिया है। कार्यकर्ताओं की भावना और जनता की अपेक्षा के साथ ही जीतने की संभावना पर ध्यान रखते हुए पार्टी विचार करती है। यह पार्टी एक चुनाव के लिए नहीं बल्कि लगातार एक वैचारिक उद्देश्य को लेकर कार्य करती है इसलिए उस दृष्टि से निर्णय भी लिए जाते हैं।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles