मध्‍य प्रदेश सरकार किसान को देसी गाय रखने पर 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान देगी

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार किसानों को देसी गाय रखने पर प्रतिवर्ष दस हजार 800 रुपये यानी प्रतिमाह नौ सौ रुपये का अनुदान देगी। प्राकृतिक कृषि किट लेने के लिए 75 प्रतिशत तक राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। खरीफ सीजन से पांच हजार 200 गांवों में प्राकृतिक खेती की गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी। प्रदेशभर में कार्यशालाएं होंगी और प्रत्येक विकासखंड में पांच-पांच पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नीति आयोग द्वारा नवोन्वेषी कृषि पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होकर कही। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया है, जो किसानों को प्रोत्साहित करेगा। सभी जिलों में 100-100 गांवों में प्राकृतिक खेती करने के लिए किसानों को तैयार किया जाएगा। अगले माह में कृषि से जुड़े विभागों के अधिकारियों के लिए कार्यशाला करेंगे।

उन्होंने बताया कि अब तक एक लाख 65 हजार किसानों ने प्राकृतिक खेती में रूचि दिखाई है। वे स्वयं पांच एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करेंगे। मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से भी कहा गया है कि वे भी आगे आएं ताकि उन्हें देखकर अन्य किसान भी प्रेरित हों। प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय आवश्यक है।

इसके गोबर और मूत्र से ही जीवांमृत तथा धनजीवांमृत बनाए जा सकते हैं। इसके लिए तय किया है कि किसानों को देसी गाय रखने के लिए 900 रुपये प्रति माह यानी 10 हजार 800 रुपये प्रतिवर्ष अनुदान के तौर पर दिए जाएंगे। प्रत्येक गांव में किसान मित्र और किसान दीदी की व्यवस्था भी होगी, जो प्राकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। इन्हें मानदेय भी दिया जाएगा।

भूमि के संरक्षण के लिए जरूरी है प्राकृतिक खेती

मुख्यमंत्री ने कहा कि रसायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हुई है। भूमि की सतह कठोर होने के साथ आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमि के संरक्षण के लिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने का आह्वान किया है। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के दोनों ओर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यशाला को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने संबोधित किया। इसके तकनीकी सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएसजगन मोहन रेड्डी ने भी अपने विचार रखे।

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