ग्रहण मनुष्य को क्यों और कैसे प्रभावित करते हैं

वैशाख अमावस्या को लगने वाला साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण आज है. भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण होने के कारण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. वैज्ञानिक तौर पर यह खगोलीय घटना है. ज्योतिष शास्त्र में और धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण को अशुभ माना जाता है. फिर चाहे वो सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण. ग्रहण के दौरान किसी की गर्भवती महिला को बाहर निकलने की मनाही रहती है. क्योंकि ग्रहण से आने वाली पराबैगनी किरणों का शिशु पर कुप्रभाव पड़ता है.

सूर्य ग्रहण
जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो इस घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं. इसमें चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है. जिससे सूरज का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता. इस दौरान पृथ्वी पर अंधेरा छा जाता है.

चंद्र ग्रहण
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो इस घटना को चंद्र ग्रहण कहते हैं. इसमें पृथ्वी सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक जानें से रोक देती है.

इंसान पर इसका प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा जल की प्रधानता लिए होता है, और ग्रहण के दौरान चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अत्यधिक प्रभावी होती है. जो पृथ्वी पर मौजूद जल तत्व को अपनी तरफ आकर्षित करती है. चूंकि मनुष्य का शरीर भी 70% जल से मिलकर बना है. तो चंद्र ग्रहण हो या फिर सूर्य ग्रहण दोनों ही स्थिति में इसका प्रभाव मनुष्य पर देखने को मिलता है. पंडित जी के अनुसार ग्रहण के दौरान मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति विचलित हो उठते हैं. बेचैन हो जाते हैं और अजीबोगरीब हरकत करने लगते हैं, परंतु जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है वे सामान्य हो जाते हैं.

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles