कोरोना काल के दौरान मप्र सरकार की प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास के मामले में उपलब्धि

भोपाल । कोरोना संकट के दौरान जब ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का संकट था और काम ठप पड़े हुए थे, तब मध्य प्रदेश सरकार ने एक लाख 75 हजार से ज्यादा प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास तैयार किए। इस साल साढ़े तीन लाख आवास बनाने थे, पर चार लाख बन चुके हैं। वित्त वर्ष के जो साढ़े तीन माह बचे हैं, उनमें तीन लाख और आवास बनाने की तैयारी है। इस प्रकार इस वर्ष कुल सात लाख आवास बन जाएंगे, जो प्रदेश का एक वित्तीय वर्ष में आवास बनाने का रिकार्ड होगा। योजना में कुल 27 लाख से ज्यादा आवास बनाए जाने हैं।

छह साल में 21 लाख बन चुके हैं। उधर, प्रदेश सरकार की पहल पर केंद्र सरकार ने मजदूरी भुगतान के प्रविधान में भी संशोधन कर दिया है। अब आवास निर्माण के प्रत्येक चरण की जगह जरूरत के हिसाब से भुगतान किया जा सकता है।

प्रदेश में आर्थिक सामाजिक जनगणना 2011 के आधार पर प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास के लिए पात्रता निर्धारित हुई है। वर्ष 2020-21 में जब कोरोना संक्रमण की वजह से आर्थिक गतिविधियों से लेकर अन्य काम ठप पड़े थे तब मध्य प्रदेश ने एक लाख 75 हजार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास का निर्माण कार्य पूरा किया था। सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गृह प्रवेश कराया था। प्रदेश में अब तक लगभग 21 लाख आवास बन चुके हैं। इस वर्ष चार लाख आवास का निर्माण हो चुका है।

तीन लाख आवास और बनाए जाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह निर्माण कार्य की समीक्षा की जा रही है। 45 दिन में हितग्राही को किस्त दी जाती है। यदि इस अवधि में मांग नहीं होती है तो उसकी पड़ताल कराई जाती है। इसका असर यह हुआ कि काम की गति बढ़ गई। ग्वालियर और चंबल संभाग में अतिवर्षा के कारण कार्य प्रभावित हुआ था लेकिन अब स्थितियां सामान्य होती जा रही हैं। ऐसे में पूरा विश्वास है कि इस साल मध्य प्रदेश सर्वाधिक प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास बनाने का रिकार्ड बना लेगा।

इसमें एक समस्या मजदूरी भुगतान की आती थी। केंद्र सरकार का प्रविधान था कि चरणवार मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। आवास निर्माण के समय सर्वाधिक मजदूरी की आवश्यता छत पड़ने के समय आती है। इसे दृष्ट्रिगत रखते हुए केंद्र सरकार से इस बाध्यता को समाप्त करने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। किस्त की राशि समय पर मिल जाए, इसके लिए जरूरी वित्तीय व्यवस्था भी बनाई जा रही है।

23 हजार 972 करोड़ रुपये किए जा चुके हैं व्यय

20 नवंबर 2016 से प्रारंभ हुई इस योजना में अब तक मध्य प्रदेश 23 हजार 972 करोड़ रुपये व्यय कर चुका है। केंद्र सरकार 60 प्रतिशत राशि देती है, जबकि 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार लगाती है। हितग्राही चाहे तो 70 हजार रुपये का वित्तीय संस्था से ऋण दिलाने की सुविधा भी दी जाती है। इकाई सहायता के अलावा आवास निर्माण के लिए मनरेगा से 90 से 95 दिन की मजदूरी का प्रविधान भी किया गया है। शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा से 12 हजार रुपये अलग से दिए जाते हैं।

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