महापौर को जनता, नगर पालिका और परिषद के अध्यक्षों को चुनेंगे पार्षद

भोपाल । मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव अब प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों प्रणाली से होंगे। नगर निगम के महापौर सीधे जनता द्वारा चुने जाएंगे। जबकि, नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने अध्यादेश के प्रारूप में संशोधन किया है, जिसके कानून पहलूओं का विधि एवं विधायी ने परीक्षण भी कर लिया है। अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति के बाद इसे राजपत्र में अधिसूचित करके प्रभावी किया जाएगा।

नगरीय निकाय चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएं, इसको लेकर काफी दिनों से मंथन चल रहा था। कमल नाथ सरकार के फैसले में परिवर्तन करते हुए पार्षदों की जगह सीधे जनता से महापौर और अध्यक्ष का चुनाव करने का निर्णय पहले लिया गया था। इसके लिए मध्य प्रदेश नगर पालिका विधि में संशोधन के लिए अध्यादेश का मसौदा राजभवन भी भेज दिया था लेकिन इसमें फिर संशोधन का निर्णय लिया गया।

आनन-फानन में गृह मंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि राजभवन को अभी अध्यादेश का कोई मसौदा नहीं भेजा गया है। उधर, सूत्रों ने बताया कि महापौर और अध्यक्ष का सीधे निर्वाचन करने वाले अध्यादेश के मसौदे को वापस लेकर नया प्रस्ताव तैयार किया गया। इसमें सिर्फ महापौर का चुनाव सीधे जनता के माध्यम से कराए जाने का प्रविधान किया गया है।

प्रस्ताव को नए सिरे से तैयार कर विधि विभाग से मंजूरी ली गई। इसके मुताबिक नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों के माध्यम से कराया जाएगा। दरअसल, नगरीय क्षेत्रों मंे भाजपा की स्थिति मजबूत है, इसलिए काफी विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश में सोलह नगर निगम हैं और महापौर पद का आरक्षण 2020 में हो चुका है।

तीन विकल्प पर किया गया विचार

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने के लिए तीन विकल्पों पर विचार किया गया। पहला- महापौर और अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता से कराए जाएं।

दूसरा- महापौर का जनता और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष पदों का चुनाव पार्षदों से कराया जाए।

तीसरा- महापौर और नगर पालिका के अध्यक्ष पदों का चुनाव जनता और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव पार्षद के माध्यम से कराया जाए। तीनों विकल्पों को मद्देनजर रखते हुए अध्यादेश के तीन प्रारूप भी तैयार किए गए लेकिन अंतिम सहमति सिर्फ महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने पर बनी।

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