राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्‍द ने भोपाल से दिया एक देश-एक स्वास्थ्य तंत्र का मंत्र

भोपाल । राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने शनिवार को भोपाल से एक देश-एक स्वास्थ्य तंत्र का मंत्र दिया। आरोग्य मंथन का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, एलोपैथी के विशेषज्ञ चारों पद्धति को समानान्तर उपयोग में लाने की रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं, जो आरोग्य भारती की देखरेख में किया जा रहा है।

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आरोग्य भारती द्वारा आयोजित मंथन का विषय एक ‘देश-एक स्वास्थ्य तंत्र-वर्तमान समय की आवश्यकता” रहा। राष्ट्रपति ने आमजन से दैनिक दायित्वों के साथ प्रकृति के अनुरूप सरल जीवन शैली अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा इससे हमारा स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि योग को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने विश्व का मार्गदर्शन किया है। योग, प्राणायाम, व्यायाम और आध्यात्मिक शक्ति का बोध कराया है। उन्होंने कहा कि योग से बचने के लिए बहाने ठीक नहीं हैं। योग को लेकर कुछ लोग भ्रांति फैलाते हैं, जबकि निरोग रहने के लिए कोई भेदभाव या भ्रांति आड़े नहीं आनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश की एक स्वास्थ्य सेवा के लिए वर्तमान सेवाओं को समझना होगा। दुनियाभर में महंगे इलाज के बीच भारत में सस्ते इलाज की व्यवस्था है। इसीलिए दिल्ली के अस्पतालों में देश के विभिन्न् हिस्सों के साथ विदेश के भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। उन्होंने आरोग्य भारती की इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि देश में चिकित्सा पर्यटन बढ़ रहा है, पर यह भी सच है कि जरूरत के अनुसार उपचार व्यवस्था को मजबूत करना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत सभी के आरोग्य की व्यवस्था का संकल्प है।

उन्होंने दो देशों की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां दो कार्यक्रमों में गए थे। वहां के प्रधानमंत्री एवं गवर्नर ने कहा कि भारत ने वैक्सीन नहीं दी होती, तो हमारी आधी आबादी नहीं बचती। इस मौके पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आज पिज्जा और कोल्डड्रिंक का जमाना है। जबकि स्वस्थ रहने के लिए सात्विक भोजन जरूरी है। आरोग्य भारती के प्रयासों से चिकित्सा का खर्च कम होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आरोग्य भारती के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हमने कोरोना से मुकाबला तीनों पद्धतियों का उपयोग कर किया गया। काढ़ा बांटा और योग से निरोग अभियान चलाया। चारो पद्धति का अपना महत्व है। किसी की हड्डी टूट जाए, तो उसे चूरन नहीं दे सकते। उसकी तो सर्जरी करनी होगी। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया।

लोगों में बढ़ी स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता

आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि कोरोना की वजह से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ गई है। देश में डाक्टर और जनसंख्या का अनुपात बहुत कम है। प्रयोग जैसे-जैसे होंगे चिकित्सा की लागत भी कम होगी। इससे पहले राज्यपाल, मुख्यमंत्री ने शाल-श्रीफल और आंवले का पौधा देकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।

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