प्रमोशन में आरक्षण विवाद पर MP हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

प्रमोशन में आरक्षण विवाद पर MP हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
मध्यप्रदेश प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर पर बड़ी अपडेट सामने आई है। मंगलवार को सरकार की नई प्रमोशन नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जबलपुर हाईकोर्ट (MP Highcourt Decision) ने सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण दिया। कोर्ट ने भी जवाब को रिकॉर्ड किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ़ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

यह मामला राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नई प्रमोशन नीति 2025 पर उठ रहे विवादों से संबंधित है। जिसे सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक कर्मचारी संगठन) ने चुनौती दी हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि इस पॉलिसी में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन नहीं गया। जबकि सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए नियमों के अनुपालन का दावा किया।

प्रत्येक विभाग में बनेगी कमेटी
राज्य सरकार हाई कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया है कि हर विभाग में पदोन्नति के लिए कमेटी बनाई जाए जो। आरक्षण नियमों और कोर्ट ने दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करेगी। शासन ने यह भी कहा कि जिन्हें पहले से आरक्षित वर्ग में प्रमोशन किए गए हैं, उनकी गणना उनके वर्ग में ही की जाएगी। एसटी को 20% और एससी की 16% आरक्षण मिलेगा।

कर्मचारियों को आदेश का इंतजार
यह मामला हाई कोर्ट में पिछले 7 महीना से विचाराधीन। 7 जुलाई 2025 को पहली सुनवाई की गई थी। इस दौरान राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि मामले के लंबित रहने तक कोई भी डीपीसी आयोजित नहीं की जाएगी। जिसके बाद प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया रोक दी गई थी। जिसका सीधा हजारों कर्मचारियों के करियर और प्रशासनिक व्यवस्था पर देखने को मिला। लाखों कर्मचारियों और सरकार को अदालत के आदेश का इंतजार है।

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