रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 92.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुसीबत

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 92.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुसीबत
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में जारी उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे कमजोर होकर 92.40 (अस्थायी) के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही फंड निकासी ने रुपये पर यह भारी दबाव बनाया है। यह स्थिति मुद्रा बाज़ार में बढ़ती अस्थिरता और वैश्विक व्यापारिक चिंताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

मुद्रा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार के कारोबारी सत्र में रुपये ने ऐतिहासिक गोता लगाया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में स्थानीय मुद्रा की शुरुआत ही कमज़ोरी के साथ 92.44 के स्तर पर हुई।
दिन के कारोबार के दौरान, डॉलर के मुकाबले रुपये ने 92.47 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर को छू लिया।
कारोबारी सत्र के अंत में, रुपया अपने पिछले बंद भाव से 10 पैसे का नुकसान दर्ज करते हुए 92.40 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कारक काम कर रहे हैं:

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे भारत का आयात बिल प्रभावित होने की आशंका है और डॉलर की मांग में भारी इजाफा हुआ है।
विदेशी पूंजी की निकासी: भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं। सुरक्षित निवेश की तलाश में वे भारतीय बाज़ारों से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे रुपये पर भारी दबाव पड़ा है।

शेयर बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य से राहत
इन तमाम नकारात्मक कारकों के बावजूद, रुपये में एक बहुत बड़ी और अचानक होने वाली गिरावट को रोकने में कुछ घरेलू और भू-राजनीतिक कारकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीदों ने बाज़ार की धारणा को काफी हद तक सकारात्मक बनाया है। इन उम्मीदों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में एक महत्वपूर्ण रिकवरी देखी गई, जिसने स्थानीय मुद्रा को एक मजबूत सहारा प्रदान किया और उसे और अधिक टूटने से बचा लिया।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का 92.40 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचना, भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता का सीधा परिणाम है। हालांकि घरेलू शेयर बाज़ार में सुधार और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने रुपये को आंशिक समर्थन दिया है। आगे चलकर, विदेशी निवेशकों का रुख और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा ही मुद्रा बाजार का अगला रुझान तय करेगी।

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