इंदौर में फायर सेफ्टी को लेकर जिला प्रशासन सख्त

इंदौर में फायर सेफ्टी को लेकर जिला प्रशासन सख्त
शहर की ऊंची इमारतों में आग से सुरक्षा के इंतजामों को लेकर जिला प्रशासन अब एक्शन मोड में आ गया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फायर सेफ्टी मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में जी+3 (ग्राउंड फ्लोर प्लस तीन मंजिल) और उससे अधिक ऊंचाई वाली सभी व्यावसायिक और अन्य इमारतों को अपने फायर सेफ्टी प्लान और उपकरणों को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल भी विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 15 दिन की दी गई मोहलत के बाद यदि किसी भी इमारत में फायर सेफ्टी के मानकों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित भवन मालिकों और प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कल से शुरू होगा औचक निरीक्षण का दौर
प्रशासन सिर्फ नोटिस देकर ही नहीं रुकेगा, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर भी काम करेगा। कलेक्टर वर्मा के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में विशेष दलों का गठन किया गया है, जो कल से ही शहर की बहुमंजिला इमारतों का निरीक्षण शुरू कर देंगे। यह टीमें रैंडम चेकिंग करेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इमारतों में अग्निशमन उपकरण काम कर रहे हैं या नहीं, आपातकालीन निकासी के रास्ते (Emergency Exit) साफ और खुले हैं या नहीं, और क्या भवन के पास सभी जरूरी लाइसेंस और अनुमतियां हैं।

अवैध निर्माण भी होंगे चिन्हित
बैठक के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई इमारतों में मूल निर्माण के बाद अतिरिक्त या अवैध निर्माण कर लिया गया है, जो बिल्डिंग बायलॉज का सीधा उल्लंघन है। ऐसे निर्माण न केवल अवैध हैं बल्कि आग जैसी आपात स्थिति में बड़े खतरे का कारण भी बन सकते हैं। प्रशासन ने ऐसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। अवैध निर्माणों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

अधिकारियों ने फायर सेफ्टी से जुड़े निरीक्षण और मूल्यांकन के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता भी बताई। इस पर कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी मानकों की उचित ट्रेनिंग दी जाएगी। इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब केवल खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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