ईरान के हमले से अमेरिका को भारी नुकसान, 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया फाइटर जेट

ईरान के हमले से अमेरिका को भारी नुकसान, 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया फाइटर जेट
ईरान की तरफ से जंग के दौरान 2 अमेरिकी फाइटर जेट गिराए जाने के बाद एक बार फिर 2003 के इराक युद्ध की याद आने लगी है. उस समय भी अमेरिका ने इराक में सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे बाद में एक बड़ी गलती माना गया था. इस बार भी हालात कुछ उसी तरह के दिख रहे हैं, इसलिए दोनों की तुलना की जा रही है. ईरान ने शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को अमेरिका के दो लड़ाकू विमान गिराए. यह पिछले 23 साल में पहली बार है जब किसी युद्ध के दौरान अमेरिकी फाइटर जेट को गिराया गया है. इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान A-10 थंडरबोल्ट II विमान गिराया गया था. यह जानकारी अमेरिका के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल ने दी.

इतने साल बाद हुआ यह हमला दिखाता है कि ईरान अब भी मजबूत है और जवाब देने की क्षमता रखता है. यह उस दावे के उलट है जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि ईरान की ताकत पूरी तरह खत्म कर दी गई है. ट्रंप ने कई बार कहा था कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है, लेकिन ताजा घटनाओं से अलग तस्वीर सामने आ रही है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने एक F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को गिराया. उसमें मौजूद एक क्रू मेंबर को बचा लिया गया, लेकिन दूसरे की तलाश अभी भी जारी है.

ईरानी मीडिया ने क्या किया दावा
ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि एक अमेरिकी A-10 हमला करने वाला विमान भी गिरा, लेकिन उसका पायलट पैराशूट से कूदकर कुवैत में सुरक्षित उतर गया. पिछले 23 सालों में अमेरिका ज्यादातर ऐसे दुश्मनों से लड़ता रहा है जिनके पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम नहीं थी, इसलिए उसके विमान गिरने की घटनाएं बहुत कम हुईं. हालांकि, ईरान के पास एक संगठित और मजबूत सेना है, जो ऐसे हमले कर सकती है. हालांकि, रिटायर्ड जनरल कैंटवेल ने यह भी कहा कि अमेरिका की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इतने बड़े युद्ध के बावजूद ज्यादा विमान नहीं गिरे. उन्होंने इसे हैरान करने वाला बताया और कहा कि अमेरिकी विमान रोज खतरे में उड़ान भरते हैं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस जंग में अब तक 13,000 से ज्यादा मिशन उड़ाए जा चुके हैं और 12,300 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया है. फिर भी ईरान लगातार जवाब दे रहा है और इजरायल व खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के आसपास हमले कर रहा है. इससे पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास ज्यादा ताकत है, लेकिन सिर्फ हवाई बढ़त होना और पूरी तरह नियंत्रण होना अलग बात है. उनका कहना है कि अगर किसी देश की एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर भी हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह खत्म हो गया है. यही कारण है कि ईरान अब भी लड़ रहा है और जवाब दे रहा है, जिससे यह जंग और लंबी और खतरनाक हो सकती है.

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