विराट होता सूर्यवंशी का वैभव

विराट होता सूर्यवंशी का वैभव
गुवाहाटी में मंगलवार रात राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए मुकाबले में एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा गेंदबाज था तो दूसरी तरफ 15 वर्षीय बल्लेबाज। इस मैच को जसप्रीत बुमराह बनाम वैभव सूर्यवंशी के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सभी के मन में यह सवाल था कि कैसे एक बच्चा दुनिया के सबसे घातक गेंदबाज का सामना करेगा, लेकिन वैभव ने बुमराह की गेंदों पर दो अविश्वसनीय छक्के लगाकर बता दिया कि ये बल्लेबाज बेहद खास है।

बल्‍लेबाजों का सपना होता
बुमराह को छक्के लगाना हर बल्लेबाज का सपना होता है और पाकिस्तानी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ने तो एशिया कप में बुमराह को तीन छक्के जड़ने के बाद ‘डाक्यूमेंट्री’ तक बना डाली थी। विराट कोहली जैसा दिग्गज बल्लेबाज अपने आईपीएल करियर में बुमराह के विरुद्ध केवल तीन छक्के लगा पाया है, जबकि वैभव सूर्यवंशी पहली बार बुमराह का सामना करते हुए दो छक्के जड़ चुके हैं।

अब सूर्यवंशी सिर्फ भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुके हैं। एक ऐसा नाम, जिससे हर गेंदबाज को सतर्क रहना होगा। 30 अप्रैल 2025 की शाम जयपुर में ट्रेंट बोल्ट से पूछा गया था क्या अब उन्हें और बुमराह जैसे गेंदबाजों को एक 14 साल के बल्लेबाज को आउट करने की रणनीति बनानी पड़ रही है तो बोल्ट ने हंसते हुए कहा था कि वह इतने बड़े मंच पर किसी युवा खिलाड़ी को लेकर ‘चिंतित’ नहीं होंगे। उस समय यह बात मजाक जैसी लगी थी, लेकिन एक साल से भी कम समय में हालात पूरी तरह बदल गए।

बुमराह का सामना किया
बारिश से प्रभावित मुकाबले में जब खेल शुरू हुआ तो मुंबई के पास दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों का आक्रमण था, लेकिन सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाते हुए सभी योजनाओं को ध्वस्त कर दिया। दीपक चाहर के पहले ओवर में यशस्वी जायसवाल ने 22 रन बटोरकर लय बनाई, जिसके बाद सूर्यवंशी ने बुमराह का सामना किया। पहली ही गेंद पर लॉगऑन के ऊपर छक्का जड़कर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए।

तीन गेंद बाद उन्होंने बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर एक और छक्का लगाकर यह साबित कर दिया कि यह कोई संयोग नहीं था। बोल्ट भी सूर्यवंशी के ‘प्रकोप’ से अछूते नहीं रहे। उनकी एक चूक को सूर्यवंशी ने छक्के में तब्दील कर दिया। उस समय ऐसा लगा मानो अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं रह गया हो। सूर्यवंशी के सामने हर गेंदबाज सामान्य नजर आ रहा था।

11-11 ओवर का हुआ मैच
बारिश के कारण मुकाबला 11-11 ओवर का था, जिससे राजस्थान पर तेजी से रन बनाने का दबाव था। हालांकि, सूर्यवंशी के लिए यह कोई दबाव नहीं, बल्कि अवसर था। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट्स खेलते हुए गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। मुंबई के गेंदबाजों ने उनकी ताकत को देखते हुए स्टंप लाइन से दूर गेंदबाजी करने की कोशिश की, ताकि उन्हें आफ साइड पर खेलने पर मजबूर किया जा सके, लेकिन सूर्यवंशी ने इन रणनीतियों को भी बेअसर कर दिया। अंतत: वह शार्दुल ठाकुर की गेंद पर आउट हुए, जब तिलक वर्मा ने कैच लपका।

यशस्‍वी को मिली प्रेरणा
आउट होने से पहले उन्होंने महज चार गेंदों में 17 रन कूटे। दूसरी ओर यशस्वी ने भी शानदार पारी खेलते हुए 32 गेंदों पर नाबाद 77 रन बनाए, लेकिन सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने उनकी चमक को भी कुछ हद तक फीका कर दिया। मैच के बाद जायसवाल ने भी स्वीकार किया कि सूर्यवंशी का प्रदर्शन उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है।

मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या और कोच महेला जयवर्धने ने हार के बाद कहा कि सिर्फ पांच छक्कों का अंतर मैच का फैसला कर गया। हालांकि वास्तविकता में यह अंतर कहीं ज्यादा बड़ा था, क्योंकि शुरुआती पांच ओवरों में ही राजस्थान ने मुकाबले की दिशा तय कर दी थी। राजस्थान की यह जीत पूरी तरह से एकतरफा रही, जिसमें जायसवाल की परिपक्वता और सूर्यवंशी की निडरता का बेहतरीन संगम देखने को मिला।

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