नेपाल के ‘₹100 नियम’ ने सीमावर्ती इलाकों में पैदा की भारी नाराजगी

नेपाल के ‘₹100 नियम’ ने सीमावर्ती इलाकों में पैदा की भारी नाराजगी
भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल सरकार द्वारा भंसार (कस्टम) नियमों में की गई सख्ती का असर अब आम जनजीवन के साथ सामाजिक परंपराओं तक पहुंच गया है। स्थिति यह है कि अब शादी-ब्याह में मिलने वाले उपहार भी जांच और कर के दायरे में आ रहे हैं। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में चिंता और असंतोष बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में नेपाल प्रशासन ने सीमा पार से आने वाले सामान पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, लगभग 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भी भंसार अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में कपड़े, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य घरेलू वस्तुएं भी जांच के बाद ही नेपाल में प्रवेश कर पा रही हैं। इस सख्ती का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोजमर्रा की जरूरतों या छोटे व्यवसाय के लिए सीमा पार करते हैं।

बढ़नी कस्बे से कृष्णानगर जाकर चाट और फुल्की बेचने वाले स्थानीय युवक ईलू और बम्मड़ को नेपाल पुलिस ने लिंक गेट से वापस कर दिया। इसी तरह फुटकर में पेय पदार्थ, अंडा और सरसों का तेल लेकर जाने वाले कई लोगों को भी लौटा दिया जा रहा है, क्योंकि इन वस्तुओं का भंसार नहीं हो पा रहा है।

सामाजिक स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रिश्तेदारी और पारिवारिक आयोजनों में उपहारों का आदान-प्रदान सामान्य परंपरा रही है। अब लोग शादी में मिले सामान को सीमा पार ले जाने से पहले उसकी कीमत और संभावित भंसार को लेकर असमंजस में हैं।

चंद्रौटा शिवपुरी निवासी सुंदर चौधरी और खरेंद्रपुर निवासी रामबरन ने बताया कि इटवा में आयोजित शादी से लौटते समय उनके साथ लाए गए उपहारों को भंसार कर्मियों ने रोक लिया और कर अदा करने के बाद ही उन्हें आगे जाने दिया गया। नेपाल के स्थानीय व्यापारी और नागरिक भी इस सख्ती को लेकर चिंतित हैं।

कृष्णानगर निवासी अनिल अग्रवाल, बिपिन गुप्ता और कौशलेश चतुर्वेदी का कहना है कि इससे न केवल छोटे व्यापार प्रभावित होंगे, बल्कि वर्षों से चले आ रहे सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ेगा। लोगों में इस नियम को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

क्यों लिया गया ये फैसला?
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और अवैध वस्तुओं की आवाजाही पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कृष्णानगर भंसार कार्यालय के सूचना अधिकारी मयंक कुमार कर्ण के अनुसार, यह नियम पहले से लागू था, लेकिन अब सख्ती से इसका पालन कराया जा रहा है। फिलहाल, इस सख्ती ने सीमा क्षेत्र के लोगों की दिनचर्या और सामाजिक जीवन दोनों को प्रभावित कर दिया है, जिससे समाधान की उम्मीद में लोग प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

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