मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर

मध्य प्रदेश में संविदा कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला, 50% कोटा मंजूर
मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे।

वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी
यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा और जीएडी की सख्ती
घोषणाओं को पूरा कराने के लिए संविदा कर्मचारियों का भोपाल में महासम्मेलन बुलाया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि सभी प्रविधानों को लागू कराया जाएगा। यदि किसी प्रविधान को लेकर समस्या है तो संगठन के पदाधिकारी, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी बैठकर उसका रास्ता निकालेंगे। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र जारी कर सभी विभागाध्यक्षों से संविदा नियम के क्रियान्वयन का फीडबैक मांगा।

विभागों को निर्देश और स्कूल शिक्षा विभाग की पहल
इसमें पूछा गया कि किसने नियम लागू किए और किसने नहीं। जहां लागू नहीं हुए, उसके कारण क्या रहे। विभागों को स्पष्ट रूप से कह दिया गया है कि सरकार ने जब निर्णय ले लिया है तो फिर सेवा भर्ती नियम में संशोधन किए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसमें पहल की और नियम संशोधित कर अधिसूचित कर दिए।

5 साल की सेवा पर मिलेगा नियमित भर्ती का लाभ
मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि वर्ष 2018 की संविदा नीति में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान था जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती में नहीं दिया। कई मामले न्यायालय पहुंचे। इसमें विभागीय अधिकारी यह जवाब नहीं दे पाए कि उन्होंने पद आरक्षित कर लाभ क्यों नहीं दिया। अब विभाग ने गलती सुधारी है। यह प्रविधान किया गया है कि जिन संविदा कर्मचारियों ने पांच साल निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नियमित भर्ती के समय लाभ मिलेगा।

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