अमेरिका और ईरान के बीच अभी तक दोबारा बातचीत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच अभी तक दोबारा बातचीत नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की आखिरी तारीख पार हो चुकी है. हालांकि अभी तक दोनों ही देश दूसरी बार बातचीत के लिए एक ही टेबल पर साथ नहीं आ पाए हैं. अमेरिका का डेलीगेशन इस वक्त पाकिस्तान में है. वहीं ईरान की तरफ से भी डेलीगेशन आया है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के सूत्रों के मुताबिक ईरानी डेलीगेशन अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बात करने को तैयार नहीं है. उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक बड़ी शर्त रखी है.

दरअसल ईरानी डेलीगेशन ने स्पष्ट कह दिया है कि अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत तब तक नहीं हो सकती है, जब तक वह अपना नेवल ब्लाकेड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नहीं हटा देता है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व वाला ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के तीनों सेनाओ के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अध्यक्षता वाले डेलीगेशन के साथ मुलाकात करके एक लिखित फ्रेमवर्क भी दे चुका है.

अमेरिका-ईरान के बीच किन बातों पर फंसा पेंच
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से बंद कर दे, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है. पहले दौर की बातचीत के दौरान भी इसी बात पर मामला अटक गया था. इसके साथ-साथ होर्मुज के मसले पर भी बात नहीं बन पायी थी. अब ईरान का कहना है कि दूसरे दौर की बात तभी होगी जब होर्मुज से अमेरिकी नेवी हट जाएगी.

ईरान-पाकिस्तान की बातचीत में कौन-कौन रहा शामिल
ईरान के डेलीगेशन से उसी पाकिस्तानी डेलीगेशन ने बातचीत की है जो कि तेहरान गया था. इसमें DG-ISI लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक, DGMO काशिफ अब्दुल्ला, गृहमंत्री मोहसिन नकवी और आसिम मुनीर के प्राइवेट सेक्रेटरी मेजर जनरल सैयद जवाद तारिक शामिल थे. अगर ईरानी डेलीगेशन की बात करें तो इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अलावा उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई और पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेज़ा अमीरी मोघदम शामिल थे.

बैठक के बाद पाक विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्था में प्रस्तावित बातचीत को लेकर विदेश मंत्री इशाक डार ने शनिवार (25 अप्रैल) को अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके लिखा कि में विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर आधिकारिक नीति केवल सरकारी स्रोतों द्वारा जारी की जाती है.

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