यूपी के 865 होनहारों को योगी सरकार देगी फ्री हॉस्टल, किताबें और टॉप क्लास कोचिंग

यूपी के 865 होनहारों को योगी सरकार देगी फ्री हॉस्टल, किताबें और टॉप क्लास कोचिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के गरीब व होनहार युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में भेजने के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना’ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए अब राज्य के प्रतिभावान छात्रों को देश और प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC और UPPSC) की तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी।

5 जुलाई को 10 हजार से अधिक अभ्यर्थी आजमाएंगे भाग्य
इस योजना के अंतर्गत दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आगामी 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कुल 10,175 छात्र-छात्राएं शामिल होने जा रहे हैं। परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पारदर्शी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों की छंटनी होगी। चयनित छात्र-छात्राओं के लिए नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ हो जाएंगी और यह विशेष शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा।

7 हाई-टेक सेंटर और 865 सीटें: रहना, खाना और किताबें सब मुफ्त
प्रदेश भर में स्थापित सात अत्याधुनिक आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा। सरकार ने इसमें एक विशेष व्यवस्था भी की है, जिसके तहत 25 प्रतिशत सीटें उन छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा (Preliminary Exam) पहले ही क्वालीफाई कर चुके हैं। चयनित युवाओं को हॉस्टल में रहने, पौष्टिक भोजन, बेहतरीन पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और देश के अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन जैसी सभी विश्वस्तरीय सुविधाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री का विजन: आर्थिक तंगी से नहीं होगा समझौतो का दौर
यह योजना महज एक कोचिंग कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बड़ा विजन है। मुख्यमंत्री की स्पष्ट मंशा है कि आर्थिक तंगी या संसाधनों का अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य और उसके बड़े सपनों के आड़े नहीं आना चाहिए। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार इन होनहारों की पढ़ाई का पूरा खर्च खुद उठा रही है।

निजी कोचिंग के लाखों के खर्च से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान दौर में जहां निजी संस्थानों में आईएएस-पीसीएस की तैयारी के नाम पर लाखों रुपये की फीस वसूली जाती है, वहीं गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह खर्च उठा पाना नामुमकिन होता है। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, योगी सरकार की इस पहल से वंचित और शोषित वर्ग के युवाओं में नया आत्मविश्वास जगा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही दिशा मिलने से अब ये युवा भी ब्यूरोक्रेसी (प्रशासनिक सेवाओं) में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराएंगे, जिससे आने वाले समय में समाज में एक बेहद सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

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