रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारी मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने जस्टिस चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक (Oschadbank) से जुड़े निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 के द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के सामने चल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक की उन संपत्तियों से जुड़ा है, जिनके बारे में बैंक का दावा है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद उसे डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में नुकसान हुआ। बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद संबंधी नोटिस भेजा था, जिसके बाद मामला अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया तक पहुंचा।
तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा विवाद की सुनवाई
मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री डियाला जिमेनेज ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष होंगी, जबकि यूक्रेन के ओशचाडबैंक ने ग्रीक मध्यस्थ स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। रूस की ओर से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ इस ट्रिब्यूनल में मध्यस्थ के तौर पर शामिल होंगे।
पहले भी रूस ने दिया था प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस चंद्रचूड़ ने इससे पहले रूस की ओर से कुछ अन्य निवेश संधि विवादों में मध्यस्थ बनने के प्रस्ताव ठुकराए थे। हालांकि, इस मामले में उन्होंने रूस का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी स्वीकार की है।
पुराने क्रीमिया मामले से अलग है विवाद
यह मामला ओशचाडबैंक से जुड़े 2014 के क्रीमिया विवाद से अलग है। उस पुराने मामले में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए ओशचाडबैंक को करीब 1.1 अरब डॉलर का मुआवजा, ब्याज और मध्यस्थता लागत देने का आदेश दिया था।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की इस नियुक्ति को अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों में उनकी विशेषज्ञता और प्रतिष्ठा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि उनकी भूमिका रूस-यूक्रेन युद्ध में राजनीतिक मध्यस्थ की नहीं, बल्कि एक विशिष्ट निवेश-विवाद से जुड़े arbitrator की है।

