नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 389 हो गई है, जबकि नेपाल और तिब्बत में 1,400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।
भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा जिले के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। बाढ़ का पानी अपने साथ वाहन, मकान, सड़कें और पुल तक बहा ले गया। कई इलाकों का संपर्क टूट जाने से राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं।
शुरुआत में क्षेत्र में आए तेज झटकों को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार शुरुआती तौर पर दर्ज की गई भूकंपीय गतिविधि वास्तव में हिमनद के ढहने और मलबे के बहाव से जुड़ी थी। इस घटना के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर तेजी से आया, जिससे फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी।
नेपाल में सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवान राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है। नेपाल सेना ने कई हेलीकॉप्टर और आपदा प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं।
इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है। भारत के भी कई नागरिक प्रभावित क्षेत्र में लापता बताए गए हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से राहत और बचाव प्रयासों के साथ नागरिकों की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना और लापता लोगों का पता लगाना है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें और लगातार बने खतरे के बीच बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

