ग्वालियर में ओमिक्रोन की दस्तक, चंडीगढ़ से लौटे डीआरडीई के वैज्ञानिक हुए संक्रमित

ग्वालियर। ग्वालियर में कोरोना के म्यूटेंट वायरस ओमिक्रोन की दस्तक हो गई है। इसकी पुष्टि डीआरडीई की वायरोलॉजिकल लैब में कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच में हुई है। एक सप्ताह पहले डीआरडीई के एक वैज्ञानिक चंडीगढ़ से लौटे थे। जिन्हें सर्दी, जुकाम व बुखार के लक्षण थे। उन्होंने कोरोना की जांच कराई तो वे पाजिटिव आ गए। उसके बाद सैंपल को डीआरडीई लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा, ताकि वायरस का पता लगाया जा सके। जिसमें वैज्ञानिक के ओमिक्रोन वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। वहीं शहर में कौनसा वायरस फैल रहा है इसका पता लगाने के लिए डीआरडीई के डायरेक्टर ने जीआर मेडिकल कालेज के डीन को पत्र लिखकर संक्रमित मरीजों के सैंपल की मांग की है। जिससे जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की जा सके। जीआर मेडिकल कालेज के डीन डा. समीर गुप्ता का कहना है कि भोपाल से अनुमति मिलने पर ही डीआरडीई को सैंपल उपलब्ध कराए जाएंगे। डीआरडीई के डायरेक्टर का कहना है कि यदि सैंपल मिले तो वह एक सप्ताह में जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच रिपोर्ट उपलब्ध करा देंगे।

क्या होता है जीनोम सिक्वेंसिंग

हमारी कोशिकाओं के अंदर आनुवांशिक पदार्थ होता है। इसे डीएनए, आरएनए कहते हैं। इन सभी पदार्थों को सामूहिक रूप से जीनोम कहा जाता है। एक जीन की तय जगह और दो जीन के बीच की दूरी व उसके आंतरिक हिस्सों के व्यवहार तथा उसकी दूरी को समझने के लिए कई तरीकों से जीनोम मैपिंग या जीनोम सिक्वेंसिंग की जाती है। जीनोम मैपिंग से पता चलता है कि जीनोम में किस तरह के बदलाव आए हैं। यानी ओमिक्रोन की जीनोम मैपिंग होती है तो उसके जैनेटिक मटेरियल की स्टडी करके यह पता किया जाता है कि इसके अंदर किस तरह के बदलाव हुए हैं। यह पुराने कोरोना वायरस से कितना अलग है। जीनोम में एक पीढ़ी से जुड़े गुणों और खासियतों को अगली पीढ़ी में भेजने की काबिलियत होती है। इसलिए अलग-अलग वैरिएंट मिलकर नया कोरोना वैरिएंट बनाते हैं। इनके अंदर पुरानी पीढ़ी के जीनोम व नए वैरिएंट की खासियत होती है। जीनोम के अध्ययन को ही जीनोमिक्स कहा जाता है।

16 सैंपल भेजे, रिपोर्ट अब तक नहीं मिली

नवंबर-दिसंबर में मिले 16 मरीजों का सैंपल दिल्ली की लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया। सैंपल जांच के लिए भेजे हुए डेढ़ माह हो गया है, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।

इनका कहना है

डीआरडीई से पत्र मिला है। पत्र में जीनोम सिक्वेंसिंग कर वायरस का पता लगाने की बात बताई गई है। इसके लिए कोरोना मरीजों के सैंपल उपलब्ध कराने को कहा गया है, लेकिन हम सैंपल बिना आइसीएमआर की अनुमति के डीआरडीई को उपलब्ध नहीं करा सकते। इसलिए भोपाल में विभाग के आला अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगेंगे और जो पत्र मिला है वह भी भेजा जाएगा। अनुमति मिलने पर ही जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल दे सकेंगे।

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