छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अदालत में लंबित मामलों में समय पर जवाब दाखिल नहीं करने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अधिकारियों को न्यायिक मामलों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेशों की अनदेखी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
जवाब में देरी पर कोर्ट की सख्ती
हाई कोर्ट के समक्ष ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिलने के बावजूद समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया। एक मामले में दुर्ग कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी को नोटिस की तामील के बाद भी जवाब नहीं देने और अदालत में उपस्थित नहीं होने पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था।
अदालत ने अधिकारियों को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने और अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय के आदेशों और नोटिस को लंबित रखना अधिकारियों के लिए गंभीर विषय हो सकता है।
प्रशासनिक अधिकारियों की बढ़ेगी जवाबदेही
कोर्ट के इस रुख के बाद सरकारी विभागों में न्यायालय से जुड़े मामलों की निगरानी और समय पर जवाब दाखिल करने को लेकर जिम्मेदारी बढ़ने की उम्मीद है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अदालत से प्राप्त नोटिस और निर्देशों पर तय समय-सीमा में कार्रवाई हो।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी न्यायालय से संबंधित नवीनतम सूचनाएं और आदेश उपलब्ध कराए जाते हैं।

