नाम नया धंधे पुराने, नर्मदापुरम् में रेत का अवैध कारोबार शुरू

ट्रैक्टर ट्राली से किया जा रहा परिवहन,
बंद खदानों से निकल रही रेत

  • किसके संरक्षण में चल रहा है रेत का अवैध कारोबार?

narmdapuram-retनर्मदापुरम । इन दिनों रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जिस गति से चल रहा है उसे देखकर लगता है कि इन असंवैधानिक कामों को बंद कराने के लिए आखिर किसकी जिम्मेदारी है।
नर्मदा जयंती के दौरान अधिकारियों की सक्रियता से रेत के अवैध परिवहन कम हुए थे लेकिन अब फिर से रेत का अवैध कारोबार शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था नर्मदा नदी से रेत का अवैध उत्खनन करने वालों को दंडित किया जाएगा लेकिन वर्तमान में ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। इन दिनों नर्मदा नदी की कई रेत खदानें बंद है। फिर भी यहां से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है।
ट्रैक्टर ट्राली मशीन द्वारा दिनदहाड़े आम सड़कों से रेत का परिवहन किया जा रहा है लेकिन ना तो प्रशासन का इस ओर ध्यान है और ना ही परिवहन विभाग की कोई कार्रवाई है। रेत का अवैध कारोबार निरंतर जारी है। ट्रैक्टर ट्राली में प्लास्टिक पाल लगाकर रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है।

वीआईपी निवास मार्गों से गुजरते है रेत से भरे वाहन

नर्मदापुरम के महत्वपूर्ण मार्गों में सिविल लाइन मालाखेड़ी मार्ग से होकर रेत से भरे वाहन गुजरते हैं जबकि इस मार्ग पर कमिश्नर कलेक्टर जिला जज मुख्य वन संरक्षक पुलिस अधीक्षक जैसे संभाग और जिला स्तर के अधिकारी निवासरत हैं। उनके बंगलों के सामने से यह रेत के ट्रैक्टर ट्राली निकलते हैं। इन वाहनों की गति देखते ही बनती है। इस मार्ग पर पूर्व में दुर्घटनाएं भी हुई है लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं गया।

खनिज विभाग के अधिकारियों का नहीं है ध्यान

कहने को शासन ने खनिज विभाग को रेत के अवैध परिवहन और उत्खनन को लेकर कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन इनके द्वारा नाम मात्र कार्यवाही की जाती है।
वर्तमान में पदस्थ जिला खनिज अधिकारी पूर्व में भी इस जिले में पदस्थ रह चुके हैं उनकी कार्यवाही पहले भी चर्चित रही वर्तमान में माफियाओं के प्रति उन का रवैया भी नरम है।
एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन लाखों रुपए की अवैध रेत उत्खनन होकर परिवहन की जा रही है। जिले के कई थानों के सामने से रेत के वाहन गुजरते हैं लेकिन इनकी धरपकड़ की कार्रवाई यातायात पुलिस द्वारा भी नहीं की जाती। कई वाहनों के पास पंजीयन परमिट नहीं होने के बावजूद भी यातायात के अंग बने हुए हैं। ऐसे अवैधानिक तरीके से चल रहे वाहनों को लेकर यातायात पुलिस का दायित्व कहां तक है? यह जानने के लिए नागरिक उत्सुक हैं।

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