किसानों और मजदूरों को साहूकारों के कर्ज से मुक्ति का संशोधित विधेयक मंजूर

भोपाल : स्वास्थ्य विभाग में अब प्रबंधन का काम देखने के लिए लोक सेवा प्रबंधन के नाम से एक अलग कैडर बनाया जाएगा। इसमें 675 पद होंगे।  प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब दवाओं, उपकरणों की खरीदी और प्रबंधकीय कार्य के लिए एक अलग कैडर बनेगा। कैबिनेट में इसे लेकर आज चर्चा की गई। अस्पताल प्रबंधन संवर्ग का निर्माण किया जाएगा।

नवीन संवर्ग निर्माण हेतु चिकित्सक संवर्ग, विशेष संवर्ग एवं लोक स्वास्थ्य प्रबंधन  संवर्ग में पदोन्नति के पदों को क्रमोन्नत वेतनमान के पद में परिवर्तित करते हुए क्रमोन्नत, चार स्तरीय वेतनमान अनुसार पदपूर्ति की जाएगी। नए संवर्ग के लिए 88 नए पदों की स्वीकृति और 19 पद समर्पित किए जाने की मंजूरी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग में अब चार कैडर होंगे। एक चिकित्सक संवर्ग,  दूसरा विशेषज्ञ संवर्ग, तीसरा लोक स्वास्थ्य प्रबंधन संवर्ग एवं चौथा अस्पताल प्रबंधन संवर्ग। एमबीबीएस डिग्री वाले ऐसे चिकित्सक जिन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन में डिप्लोमा किया है उन्हें इस नये कैडर में रखा जाएगा। विशेषज्ञों के पदनाम भी बदले जाएंगे।

तीन नये पुरस्कार
मध्यप्रदेश गौरव सम्मान,  शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु तथा नवाचार हेतु दो मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार शुरु किए जाने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन कैबिनेट से किया गया। जनसहभागिता से वनों के संरक्षण की योजना पर भी चर्चा की गई।

प्रदेश के छोटे किसान और कृषि मजदूरों को अपंजीकृत साहूकारों से 15 अगस्त 2020 तक लिए गए कर्ज और उसके ब्याज से मुक्ति मिल सकेगी। इसके लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सीमांत व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक ऋण विमुक्ति विधेयक 2022 के प्रारुप का अनुमोदन आज कैबिनेट से किया गया। इस संशोधित विधेयक को विधानसभा में पारित कराने के बाद लागू किया जाएगा।

शिवराज सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को गैर पंजीकृत साहूकारों के ऋण से मुक्ति दिलाने के लिए अधिनियम में संशोधन पहले ही कर दिया था। अब गैर अनुसूचित जनजाति वर्ग के  दो हेक्टेयर से कम भूमिधारक छोटे किसान और कृषि मजदूरों के लिए  यह प्रावधान किया जा रहा है।  इस विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने के पूर्व राष्टÑपति से अनुमति प्राप्त करने एवं विधानसभा से पारित कराने की सभी कार्यवाही हेतु राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है।

इस विधेयक के तहत अपंजीकृत साहूकारों से लिया गया कर्ज और ब्याज राशि माफ हो जाएगी। वसूली के लिए कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकेगी। यदि कोई चल या अचल सम्पत्ति गिरीवी रखी है तो उसे भी मुक्त करना होगा। ऐसा नहीं करने पर तीन वर्ष का कारावास या एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा। सिविल न्यायालय में इससे जुड़े मामले स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

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