नई दिल्ली,एजेंसी। सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अपने पुराने ढर्रे को पीछे छोडती नजर आने लगी है। इस नये रूप से कांग्रेस के पुराने नेताओं में बैचैनी है तो अपेक्षाकृत युवा वर्ग भी इसे समझने की कोशिश कर रहा है। हाल के कुछ फैसलों पर गौर करने पर इसका पता चलता है कि आखिर हो क्या रहा है।नवजोत सिंह सिद्धू को जिस प्रकार विरोध के बावजूद कमान दी गई उससे यह संकेत साफ है कि पार्टी कुछ अलग सोच रही है। पार्टी में अब उन लोगों को भी महत्वपूर्ण पदों पर बिठाने से गुरेज नहीं जो हाल में ही पार्टी में शामिल हुए हैं।इससे पहले महाराष्ट्र व तेलंगाना में अध्यक्ष बदलने से लेकर गुजरात में नयी हलचल बता रही है कि कांग्रेस के भीतर राहुल गांध्ाी वप्रियंका गाध्ाी की जोड़ी कुछ अलग सोच रही है। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने भी कांग्रेस से गये हमेंत सरमा को असम का सीएम बना दिया है तो ज्योतिरादित्य सिंध्ािया को केंद्र में मंत्री। इध्ार सिद्धू की पंजाब कांग्रेस के प्रमुख के रूप में नियुक्ति गांधी भाई-बहनों की मंजूरी बडे बदलाव का संकेत है। अब तक पार्टी संगठन में ‘वफादारी’ को तरजीह दी जाती थी। मगर अमरिंदर सिंह के विरोध के बावजूद सिद्धू का प्रमोशन उस एक नये पैटर्न का हिस्सा है जिस पर कांग्रेस ने कदम रखे हैं। सिद्धू को तमाम विरोध के बावजूद कमान सौंप दी गई और वो कारण भी काम नहीं आया कि वो पुराने कांग्रेसी नहीं हैं। सिध्दू भाजपा से होते हुए कुछ बरस पहले ही कांग्रेस मे अये हैं।

इससे ठीक पहले तेलंगाना के भीतर भी कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर घमासान था। बमुश्किल दो हफ्ते पहले, कांग्रेस ने तमाम विरोध प्रदर्शनों को खारिज करते हुए रेवंत रेड्डी को तेलंगाना कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया। रेड्डी 2017 में तेलुगु देशम पार्टी से कांग्रेस में आये। 53 साल के रेवंत रेड्डी का तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनना इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि उन्होंने आरएसएस के अनुषंगिक संगठन- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था।वे टीआरएस में भी रहे और तेलगुदेशम में भी।
प्रशांत की लेटरल एंट्री
अब’लेटरल एंट्री’ के तहत चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को कांग्रेस पार्टी के भीतर कोई बडा पद मिलने की चर्चा है। पिछले दिनों ही उनकी पार्टी को पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से बातचीत हुई थी। वहीं कांग्रेस से कुछ साल पहले जुडने वाले हार्दिक पटेल भी गुजरात अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं। पाटीदार आंदोलन के रूप में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने वाले युवा नेता प्रमोशन न मिलने से नाराज होने की खबरे भी हैं। हालांकि वो इस वक्त प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। इससे पहले कांग्रेस ने नाना पटोले को महाराष्ट्र कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है वे भी 2014 में भाजपा सांसद चुने गये थे।

