लालकिला मैदान में जनजातीय महाकुंभ, जंगलों पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे -अमित शाह

लालकिला मैदान में जनजातीय महाकुंभ, जंगलों पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे -अमित शाह
देश की राजधानी दिल्ली का लालकिला मैदान रविवार को विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम और रैली का केंद्र बना रहा। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश समेत देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंचे।

इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनजातीय समाज को संबोधित करते हुए कहा, “हर भाषा, हर बोली को प्रतिनिधित्व करने वाले वनवासी भाइयों-बहनों को मैं प्रणाम करता हूं। जनजातियों का यह महाकुंभ आने वाले कई वर्षों तक याद किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा, “हमारे जंगलों पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे।”

धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार दिया है। किसी को लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। हमें आज दिल्ली की इस धरती से अपने धर्म की रक्षा का संकल्प लेना होगा। यही हमें अपनी संस्कृति और देश से जोड़े रखेगा।”

समाज का हृदय से स्वागत करता
उन्होंने कहा, “मैं मध्य प्रदेश और गुजरात से आए अपने सभी भाइयों-बहनों, भील और मुंडा समाज, छत्तीसगढ़ से आए गोंड और कोलाम समाज, झारखंड और ओडिशा के संथाल और उरांव समाज, पूर्वोत्तर से आए बोडो, कार्बी, डिमासा, खासी, गारो और चकमा समाज, तथा आंध्र प्रदेश के चेंचू समाज का हृदय से स्वागत करता हूं।”

इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही
अमित शाह ने कहा कि दोनों संगठनों का वह आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उन्हें जीवन में इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही है।

गृह मंत्री ने कहा, “जल, जंगल और पहाड़ हमारे जनजातीय भाइयों की आजीविका का आधार हैं। यही उनकी पहचान और संस्कृति की रक्षा करने वाला अभेद्य किला भी हैं। आज दुनिया में अगर सबसे टिकाऊ और प्रकृति के अनुकूल कोई मॉडल है, तो वह जनजातीय समाज का जीवन मॉडल है और हम उसे बचाने के लिए आगे आए हैं।”

उन्होंने कहा कि सभी जनजातीय समुदायों ने बिना किसी लिखित नियम के ‘विविधता में एकता और एकता में विविधता’ के मंत्र को जीवंत बनाए रखा है।

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