दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने की दर्दनाक घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। हादसे में सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद अदालत ने सिर्फ भवन मालिक की जिम्मेदारी तक मामला सीमित नहीं रखने की बात कही और संबंधित सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, नगर निगम (MCD), दिल्ली पुलिस और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने MCD को मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG तथा हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
MCD और DU की जवाबदेही पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि निजी PG में बड़ी संख्या में छात्र रहने को मजबूर हैं। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं की कमी को भी गंभीर मुद्दा माना। अदालत का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल भवन मालिकों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी अपनी निगरानी और नियामकीय जिम्मेदारी निभानी होगी।
PG और हॉस्टलों के सुरक्षा ऑडिट के निर्देश
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक जांच की तैयारी है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा मानकों और मौजूदा नियामकीय व्यवस्था की जानकारी मांगी है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी नियम और निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
सात लोगों की मौत से दहला राजधानी
सत्य निकेतन में निजी PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारत अचानक ढह गई थी। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। घटना ने पुरानी इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा, मरम्मत कार्यों और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जांच में किन अधिकारियों और संस्थाओं की जिम्मेदारी तय होती है और राजधानी में छात्रों के लिए संचालित PG व हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

